पहला प्रमोशन छोड़ देने वाला कर्मचारी एक साल के अंदर उस पर दोबारा विचार करने का दावा नहीं कर सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने रिटायर्ड जूनियर असिस्टेंट इंदु शर्मा की रिट याचिका खारिज की, जिसमें उन्होंने भाषा और संस्कृति विभाग में अपने जूनियर्स को सीनियर असिस्टेंट के पद पर प्लेसमेंट और प्रमोशन को चुनौती दी थी।
जस्टिस रंजन शर्मा ने टिप्पणी की:
“अगर किसी कर्मचारी को ऊंचे पद पर प्रमोट किया जाता है और वह कर्मचारी अपना प्रमोशन लेने से मना कर देता है या छोड़ देता है तो उस कर्मचारी पर पहले प्रमोशन से मना करने की तारीख से एक साल की अवधि तक या जब तक अगली वैकेंसी नहीं आती, जो भी बाद में हो, तब तक दोबारा प्रमोशन के लिए विचार नहीं किया जाएगा।”
कोर्ट ने कहा कि एक बार जब कोई कर्मचारी पहले का प्रमोशन छोड़ देता है तो वह 27 अगस्त, 2004 के सरकारी निर्देशों के अनुसार एक साल के अंदर दोबारा विचार करने की मांग नहीं कर सकता।
1985 में याचिकाकर्ता ने ज्वाइन किया और 1995 में जूनियर असिस्टेंट के पद पर प्रमोट हुई। बाद में उन्हें 2001 में सीनियर असिस्टेंट के पद पर प्रमोट किया गया, लेकिन उन्होंने ज्वाइन नहीं किया।
फिर जून, 2004 में उन्हें फिर से सीनियर असिस्टेंट के पद पर प्रमोट किया गया, जिसे उन्होंने मना कर दिया। इसके बाद अन्य उम्मीदवारों को सीनियर असिस्टेंट के पद पर प्लेसमेंट दिया गया।
अपने पर विचार न किए जाने से नाराज होकर याचिकाकर्ता ने अन्य उम्मीदवारों के प्रमोशन और प्लेसमेंट को चुनौती दी और रिव्यू की मांग की।
कोर्ट ने कहा कि दूसरे उम्मीदवार को कभी प्रमोट नहीं किया गया, बल्कि उसे केवल सीनियर असिस्टेंट के पद पर प्लेसमेंट दिया गया। इसलिए इस आधार पर याचिकाकर्ता की चुनौती गलत थी।
इसके अलावा, कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता ने न तो निर्देशों को चुनौती दी और न ही अपने रिप्रेजेंटेशन को खारिज किए जाने को चुनौती दी, जो निर्देशों के अनुसार ही किया गया।
इस प्रकार, कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सीनियर असिस्टेंट के पद पर विचार और प्रमोशन से इनकार करने के फैसले को सही ठहराया।
Case Name: Indu Sharma v/s State of H.P. and others