शिकायतकर्ता की पहली शादी कायम रहते दूसरी शादी करने पर सास के खिलाफ क्रूरता की FIR कायम नहीं रह सकती: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने सास के खिलाफ क्रूरता के आरोप में दर्ज FIR रद्द करते हुए कहा कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए लागू नहीं हो सकती, क्योंकि शिकायतकर्ता ने आरोपी के बेटे से उस समय शादी की थी जब उसकी पहली शादी कानूनी रूप से कायम थी।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उसकी सास ने अपने बेटे यानी शिकायतकर्ता के पति को उसके साथ क्रूरता करने के लिए उकसाया था।
जस्टिस पी.एम. रावल ने गौर किया कि शिकायतकर्ता ने 1 फरवरी 2007 को आरोपी के बेटे से शादी करने से पहले किसी अन्य व्यक्ति से विवाह किया था। उसकी पहली शादी 20 नवंबर 2007 को जाकर कानूनी रूप से समाप्त हुई।
हाईकोर्ट ने कहा कि जब शिकायतकर्ता ने आरोपी के बेटे से विवाह किया, तब उसकी पहली शादी कायम थी। इसलिए दूसरी शादी शून्य और कानूनी रूप से अमान्य थी। इस कारण IPC की धारा 498ए के तहत अपराध लागू नहीं होता।
अदालत ने यह भी गौर किया कि शारीरिक प्रताड़ना के आरोप नवंबर 2014 के बताए गए थे, जब शिकायतकर्ता, उसका पति यानी मूल आरोपी नंबर एक और उसकी सास लंदन में रह रहे थे।
FIR में लगाए गए आरोपों पर टिप्पणी करते हुए हाईकोर्ट ने कहा,
“आरोप अस्पष्ट और सामान्य प्रकृति के प्रतीत होते हैं। FIR में घटना की कोई विशिष्ट जानकारी, तारीख, समय या स्थान नहीं बताया गया। इसके अलावा स्थापित कानूनी स्थिति को देखते हुए वर्तमान आवेदक यानी सास को बिना कोई विशिष्ट भूमिका बताए इस अपराध में शामिल किया गया। ऐसे आरोप विश्वास पैदा नहीं करते।”
शिकायतकर्ता ने यह आरोप भी लगाया कि उसके पति ने उससे विवाह कायम रहते हुए दूसरी शादी कर ली थी। इस पर अदालत ने कहा कि इस आरोप का महत्व उस तथ्य के सामने कम हो जाता है कि शिकायतकर्ता ने स्वयं आरोपी की पहली शादी के कायम रहते उसके बेटे से विवाह किया।
अदालत ने कहा,
“मूल आरोपी नंबर एक ने वर्ष 2012 में किसी दूसरी लड़की से शादी की और बाद में उससे तलाक भी ले लिया, ये आरोप इस तथ्य के सामने महत्वहीन हो जाते हैं कि शिकायतकर्ता ने स्वयं वर्तमान आवेदक के बेटे यानी मूल आरोपी नंबर एक से उस समय शादी की थी, जब उसकी पिछली शादी कायम थी।”
इन तथ्यों और कानूनी स्थिति को ध्यान में रखते हुए गुजरात हाईकोर्ट ने सास के खिलाफ क्रूरता का मामला रद्द किया।