2013 रेप केस: आसाराम ने गुजरात हाईकोर्ट से अपनी अस्थायी ज़मानत बढ़ाने की अर्ज़ी वापस ली

Update: 2026-06-12 08:29 GMT

गांधीनगर कोर्ट ने 2013 के रेप केस में आसाराम को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी। आसाराम ने शुक्रवार (12 जून) को गुजरात हाईकोर्ट से अपनी अस्थायी ज़मानत बढ़ाने की अर्ज़ी वापस ली।

आसाराम के वकील ने जस्टिस गीता गोपी और जस्टिस एलएस पीरज़ादा की डिवीज़न बेंच के सामने कहा कि राजस्थान हाई कोर्ट ने हाल ही में एक अलग रेप केस में आसाराम की सज़ा और उम्रकैद बरकरार रखी और वह अभी जोधपुर जेल में बंद हैं।

वकील ने कहा,

"मुझे मिले निर्देशों के अनुसार मुझे अस्थायी ज़मानत बढ़ाने की अर्ज़ी वापस लेने की अनुमति दी जाए।"

इसके बाद कोर्ट ने अर्ज़ी वापस लेने की अनुमति दी।

30 अप्रैल को हाईकोर्ट ने आसाराम की अस्थायी ज़मानत 15 जून तक बढ़ाई थी। जानकारी के लिए बता दें कि हाईकोर्ट ने 6 नवंबर, 2019 को मेडिकल आधार पर उनकी सज़ा को सस्पेंड कर दिया था और उन्हें छह महीने की अस्थायी ज़मानत दी थी। इसके बाद आसाराम ने अस्थायी ज़मानत बढ़ाने के लिए अर्ज़ी दी थी।

27 मई को राजस्थान हाईकोर्ट ने आसाराम को 2013 में अपने जोधपुर आश्रम में एक नाबालिग के यौन उत्पीड़न और रेप के लिए दोषी ठहराने और उम्रकैद की सज़ा सुनाने वाला आदेश बरकरार रखा था, जबकि गैंग रेप और गंभीर यौन हमले के लिए उनकी सज़ा रद्द की थी।

ऐसा करते हुए कोर्ट ने आसाराम की इस दलील को खारिज किया कि ट्रायल मीडिया प्रोपेगैंडा से प्रभावित था।

कोर्ट ने यह भी कहा कि वह आसाराम की उम्र के आधार पर उन्हें कोई रियायत नहीं दे सकता, क्योंकि वह पीड़िता की आवाज़ को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता जो अपनी गरिमा, अपनी पहचान और उस व्यक्तिव को खो चुकी है, जो उस घटना से पहले थी - एक ऐसी घटना जिसने न केवल उसे पूरी तरह से बर्बाद कर दिया बल्कि उसकी ज़िंदगी को पहले और बाद के हिस्सों में बांट दिया।

Tags:    

Similar News