RTI आवेदक को जानकारी की भाषा नहीं आती तो रिकॉर्ड देखने के लिए 'तीसरे पक्ष' को साथ नहीं ले जा सकता: गुजरात हाईकोर्ट

Update: 2026-08-08 10:07 GMT

गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि अगर कोई RTI आवेदक किसी जानकारी को मांग रहा है और उसे उस जानकारी की भाषा या उसमें दी गई बातों की समझ नहीं है तो रिकॉर्ड की जांच के दौरान आवेदक के साथ किसी दूसरे व्यक्ति को ले जाने की अनुमति देना, पहली नज़र में किसी तीसरे पक्ष को जानकारी देने जैसा होगा।

ऐसा करते हुए कोर्ट ने RTI आवेदक को उन रिकॉर्ड्स को देखने की अनुमति दी, जिनकी उसने मांग की थी, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि जांच के दौरान आवेदक के साथ किसी और को जाने की अनुमति नहीं होगी।

आरोप था कि याचिकाकर्ता RTI आवेदक छह-सात लोगों के साथ नगडाला ग्राम पंचायत के ऑफिस गया और उसने तलाटी-सह-मंत्री से ज़िद की कि वह मांगी गई जानकारी से जुड़े रिकॉर्ड्स साथ आए सभी लोगों को दिखाए। जब ​​तलाटी-सह-मंत्री ने इस मांग को मानने से इनकार किया तो आरोप लगा कि याचिकाकर्ता और उसके साथ आए लोगों ने महिला तलाटी-सह-मंत्री के साथ बदसलूकी की।

यह भी दर्ज किया गया कि जब महिला कर्मचारी ने घटना को अपने मोबाइल फोन पर रिकॉर्ड करना शुरू किया और उन्हें बताया कि पुलिस को बुलाया जाएगा, तो वे उसे कथित तौर पर धमकाकर ऑफिस से चले गए। इन तथ्यों और याचिकाकर्ता के व्यवहार पर ध्यान देते हुए संबंधित अधिकारी ने जानकारी न दिए जाने के खिलाफ याचिकाकर्ता की दूसरी अपील खारिज की।

इसके बाद याचिकाकर्ता ने एक हलफनामा दायर किया कि मांगी गई जानकारी लेने के लिए RTI अधिकारी के ऑफिस जाने पर वह अच्छे और विनम्र तरीके से पेश आएगा। इसमें यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ता के साथ ऐसा व्यक्ति होगा, जिसे दी जाने वाली जानकारी की सामग्री और भाषा की समझ हो।

जस्टिस निर्जर एस देसाई ने अपने आदेश में कहा:

"ऊपर बताई गई बातों को ध्यान में रखते हुए अगर याचिकाकर्ता खुद उस भाषा या मांगी गई जानकारी की सामग्री को नहीं समझता है तो पहली नज़र में निरीक्षण के दौरान किसी दूसरे व्यक्ति को साथ ले जाने की अनुमति देने का मतलब असल में किसी तीसरे पक्ष को जानकारी देना होगा। इससे पहली नज़र में यह धारणा बनती है कि याचिकाकर्ता केवल ऐसे तीसरे पक्ष के लिए मोहरे के तौर पर काम कर रहा है, जो सूचना का अधिकार अधिनियम का मकसद या उद्देश्य नहीं है।

हालांकि, याचिकाकर्ता द्वारा दिए गए हलफनामे और वचन (अंडरटेकिंग) के आधार पर दिए गए आश्वासन को देखते हुए, और इस बात को ध्यान में रखते हुए कि संबंधित अधिकारी के साथ कथित दुर्व्यवहार के कारण याचिकाकर्ता को रिकॉर्ड के निरीक्षण से मना कर दिया गया, 08.04.2026 के विवादित आदेश को रद्द किया जाता है। हालांकि, यह स्पष्ट किया जाता है कि याचिकाकर्ता को रिकॉर्ड के निरीक्षण की अनुमति तभी दी जाएगी, जब वह खुद निरीक्षण करे और निरीक्षण के दौरान किसी अन्य व्यक्ति को साथ ले जाने पर ज़िद न करे। जब तक याचिकाकर्ता किसी साथ आए व्यक्ति की मौजूदगी के बिना व्यक्तिगत रूप से रिकॉर्ड का निरीक्षण नहीं करता, तब तक कोई जानकारी नहीं दी जाएगी और न ही निरीक्षण की अनुमति दी जाएगी।"

अदालत ने संबंधित अधिकारी को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता को रिकॉर्ड के निरीक्षण की अनुमति दे और उसके बाद एक महीने के भीतर याचिकाकर्ता द्वारा मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराए।

अदालत ने आगे स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को रिकॉर्ड के निरीक्षण की अनुमति दी जाएगी, और संबंधित प्रतिवादी के कार्यालय के अंदर याचिकाकर्ता के साथ किसी अन्य व्यक्ति को जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

अदालत ने कहा कि निरीक्षण पूरा होने पर याचिकाकर्ता को उन दस्तावेजों की फोटोकॉपी उपलब्ध कराई जाएगी, जिनकी वह विशेष रूप से निरीक्षण किए गए रिकॉर्ड से मांग करता है। इसके लिए निर्धारित शुल्क का भुगतान करना होगा।

याचिका का निपटारा किया गया।

Case title: VALA JODHUBHAI GOLANBHAI v/s RTI OFFICER & ORS.

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