अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामला: गुजरात हाईकोर्ट ने 38 दोषियों की फांसी और 11 की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी
गुजरात हाईकोर्ट ने वर्ष 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में विशेष अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए 38 दोषियों को सुनाई गई फांसी की सजा और 11 दोषियों को दी गई आजीवन कारावास की सजा को कायम रखा है।
इस श्रृंखलाबद्ध बम धमाकों में 56 लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए।
इससे पहले वर्ष 2022 में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की उस याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें विशेष अदालत द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा की पुष्टि करने का अनुरोध किया गया।
विशेष अदालत ने वर्ष 2022 में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और भारतीय दंड संहिता की धारा 302 सहित विभिन्न प्रावधानों के तहत 49 दोषियों में से 38 को फांसी की सजा सुनाई। शेष 11 दोषियों को मृत्यु तक आजीवन कारावास की सजा दी गई।
विशेष अदालत ने मृतकों के परिजनों को एक-एक लाख रुपये, गंभीर रूप से घायल लोगों को 50-50 हजार रुपये और सामान्य रूप से घायल लोगों को 25-25 हजार रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया। साथ ही दोषियों पर जुर्माना भी लगाया गया।
विशेष अदालत ने 8 फरवरी 2022 को कुल 78 आरोपियों में से 49 को दोषी ठहराया था। उन्हें हत्या, राजद्रोह, राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने, यूएपीए और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम सहित विभिन्न अपराधों में दोषी पाया गया।
अपने फैसले में विशेष अदालत ने कहा था कि सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि आरोपी अत्यधिक शिक्षित और तकनीकी रूप से दक्ष थे। इनमें कुछ डॉक्टर, प्रोफेसर और कंप्यूटर विशेषज्ञ भी थे।
अदालत ने कहा कि इन आरोपियों से अपराध की जड़ तक पहुंचने वाली जानकारी हासिल करना बेहद कठिन था लेकिन जांच अधिकारियों ने व्यापक साक्ष्य एकत्र किए, जो निर्णय का महत्वपूर्ण आधार बने।
गौरतलब है कि 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में एक के बाद एक कई स्थानों पर बम धमाके हुए। धमाके सिविल अस्पताल, एल.जी. अस्पताल, बसों, साइकिलों, कारों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर किए गए। इन हमलों में 56 लोगों की जान गई, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए।