अडानी ग्रुप में LIC निवेश पर आर्टिकल लिखने का मामला: हाईकोर्ट ने पत्रकार रवि नायर के खिलाफ FIR रद्द करने से किया इनकार
गुजरात हाईकोर्ट ने पत्रकार रवि नायर के खिलाफ Adani Ports and SEZ Ltd. की शिकायत पर दर्ज Forgery FIR को रद्द करने से इनकार कर दिया। जस्टिस एम.आर. मेंगडे ने कहा कि समान तथ्यों पर मानहानि की निजी शिकायत लंबित होने मात्र से FIR को कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग नहीं माना जा सकता।
मामला नायर द्वारा 24 अक्टूबर 2025 को Washington Post में प्रकाशित एक लेख से जुड़ा है। लेख में दावा किया गया था कि LIC ने केंद्र सरकार के निर्देश पर अडानी समूह में 3.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश किया। नायर ने कथित तौर पर LIC और Department of Financial Services द्वारा जारी दस्तावेजों का हवाला दिया था।
लेख के बाद LIC ने कहा कि उसके नाम से बताए गए दस्तावेज उसने जारी या प्राप्त नहीं किए थे और निवेश किसी बाहरी दबाव में नहीं किया गया। वित्त मंत्रालय के Department of Financial Services ने भी ऐसे दस्तावेज तैयार किए जाने से इनकार किया।
इसके बाद Adani Ports ने नायर के खिलाफ मानहानि की निजी शिकायत दर्ज की। बाद में BNS की धारा 318(4), 336(2), 336(4) और 340(2) के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी और जाली दस्तावेज के इस्तेमाल के आरोपों में FIR दर्ज की गई।
नायर ने दलील दी कि समान तथ्यों पर मानहानि की शिकायत पहले से लंबित है और केवल दस्तावेजों से LIC के इनकार के आधार पर उन्हें जाली नहीं माना जा सकता। हालांकि, अभियोजन ने कहा कि दस्तावेजों की वास्तविकता की जांच जरूरी है।
हाईकोर्ट ने कहा कि निजी शिकायत और FIR में लगाए गए आरोप अलग हैं और दस्तावेजों की वास्तविकता की जांच जांच एजेंसी द्वारा की जानी आवश्यक है। कोर्ट ने पाया कि दस्तावेज प्रथम दृष्टया संदिग्ध प्रतीत होते हैं और जांच के दौरान उनकी सत्यता सामने आ सकती है।
इसके बाद अदालत ने रवि नायर की FIR रद्द करने की याचिका खारिज कर दी।
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