सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X ने शुक्रवार को गुजरात हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर केंद्र सरकार के सहयोग पोर्टल पर मंचों को शामिल होने के निर्देश में बदलाव की मांग की। यह अर्जी उस जनहित याचिका में दाखिल की गई, जिसमें डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर डीपफेक तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार सामग्री के तेजी से बढ़ते प्रसार पर चिंता जताई गई।

गुजरात हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डीएन रे की खंडपीठ ने 10 अप्रैल को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से दाखिल जवाबों पर अपनी प्रतिक्रिया देने को कहा था। अदालत ने प्लेटफॉर्म्स को सूचना प्रौद्योगिकी नियमों के तहत अपने दायित्वों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने तथा कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय के लिए केंद्र के सह्योग पोर्टल पर शामिल होने का निर्देश भी दिया था।

शुक्रवार को सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने मामले की मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी मांगी। याचिकाकर्ता की ओर से वकील अमित पंचाल ने बताया कि निजी प्रतिवादी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की ओर से वकीलों ने अदालत में उपस्थिति दर्ज कराई, लेकिन उन्होंने अभी जनहित याचिका पर अपना जवाब दाखिल नहीं किया। केंद्र सरकार अपना जवाब पहले ही दाखिल कर चुकी है।

X की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि प्लेटफॉर्म ने 10 अप्रैल के आदेश में सहयोग पोर्टल पर शामिल होने से संबंधित निर्देश में बदलाव की मांग करते हुए अर्जी दाखिल की। उन्होंने कहा कि X का जवाब अमेरिका से भेजा जा रहा है और जल्द ही अदालत में दाखिल कर दिया जाएगा।

वकील ने यह भी बताया कि 10 अप्रैल के आदेश में उठाया गया मुद्दा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 79(3)(बी) और सहयोग पोर्टल से जुड़ा है। उन्होंने अदालत को यह भी अवगत कराया कि केंद्र सरकार ने इसी विषय से जुड़े मामलों को सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित कराने के लिए याचिका दाखिल की।

एक्स की ओर से यह भी कहा गया कि कर्नाटक हाईकोर्ट की खंडपीठ में उसकी अपील लंबित है, जिसमें इसी तरह के मुद्दे उठाए गए। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की स्थानांतरण याचिकाओं पर नोटिस जारी किया और संबंधित मामलों में कार्यवाही पर रोक भी लगाई। X के वकील ने कहा कि विषयों में समानता को देखते हुए उन्होंने यह जानकारी अदालत के समक्ष उचित प्रक्रिया के तहत रखी है।

पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक और बंबई हाईकोर्ट में लंबित उन मामलों की कार्यवाही पर रोक लगाई, जिनमें सहयोग पोर्टल की संवैधानिक वैधता और सूचना प्रौद्योगिकी नियमों के तहत ऑनलाइन सामग्री हटाने की शक्तियों को चुनौती दी गई। केंद्र सरकार ने कर्नाटक और बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित चार मामलों को सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने की मांग की। इनमें X और डिजिटल समाचार मंचों के संगठन डिजीपब न्यूज फाउंडेशन की कर्नाटक हाईकोर्ट में दायर याचिकाएं तथा कुणाल कामरा और सीनियर एडवोकेट हरेश जगतियानी की बंबई हाईकोर्ट में दायर याचिकाएं शामिल हैं।

गुजरात हाईकोर्ट ने X को उसकी बदलाव संबंधी अर्जी पर जवाब दाखिल करने को कहा और स्पष्ट किया कि अदालत इस अर्जी पर एक्स का पक्ष सुनेगी।

इस दौरान सीनियर एडवोकेट अरविंद दातार ने मेटा की ओर से पेश होकर कहा कि कंपनी दो सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करेगी। गूगल की ओर से अदालत को बताया गया कि गूगल के स्थान पर गूगल एलएलसी को पक्षकार बनाने की अर्जी दाखिल की गई, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया।

अदालत ने कहा कि मेटा, गूगल एलएलसी, एक्स, रेडिट और स्क्रिब्ड की ओर से वकील ने उपस्थिति दर्ज कराई और सभी प्रतिवादियों को अगली सुनवाई तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी।

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