फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने आदेश की Certified Copy जारी करने में जानबूझकर देरी की: हाईकोर्ट; इसे 'Malice in Law' माना

गौहाटी हाईकोर्ट ने एक महिला को विदेशी घोषित किए जाने के बाद भारत से निकालकर बांग्लादेश भेजे जाने के मामले में असम सरकार को ₹2 लाख का अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दिया है।

जस्टिस कल्याण राय सुराना और जस्टिस सुस्मिता फूकन खौंद की खंडपीठ ने कहा कि फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने 30 मई 2026 के अपने opinion की Certified Copy जारी करने में जानबूझकर देरी की, ताकि इस दौरान महिला को अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर भारत से बाहर भेजा जा सके। कोर्ट ने इसे “Malice in Law” माना।

क्या था मामला?

महिला के खिलाफ फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल, नागांव ने पहले 2019 में विदेशी होने का opinion दिया था। हाईकोर्ट ने अप्रैल 2026 में मामले को दोबारा Tribunal भेजते हुए महिला को 30 मई को पेश होने का निर्देश दिया था।

महिला उस दिन Tribunal पहुंची, लेकिन करीब दोपहर 1 बजे पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक, उसे पहले Juria Police Station, फिर Nagaon और बाद में Matia Detention/Holding Area ले जाया गया।

महिला के पति को उसकी हिरासत और आगे की कार्रवाई की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। बाद में कोर्ट को बताया गया कि महिला को 14 जून 2026 को बांग्लादेश भेज दिया गया।

कोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है कि महिला या उसके किसी adult family member को Tribunal के opinion की copy या उसकी गिरफ्तारी और निर्वासन की जानकारी दी गई थी।

कोर्ट ने कहा कि State machinery की कार्रवाई ने महिला को हाईकोर्ट में writ petition दाखिल कर अपने खिलाफ opinion को चुनौती देने का अवसर ही नहीं दिया।

इसी आधार पर कोर्ट ने Tribunal द्वारा Certified Copy जारी करने में हुई देरी को “deliberate and wilful” बताते हुए “Malice in Law” का मामला माना।

आगे के लिए अंतरिम निर्देश

हाईकोर्ट ने असम के Border Police अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसी Declared Foreign National (DFN) को हिरासत में लेने से पहले उसे Tribunal के opinion की जानकारी और उसकी free copy दी जाए।

यदि उसे जिले के अधिकार क्षेत्र से बाहर ले जाया जाता है, तो उसके किसी adult family member को भी इसकी जानकारी देना अनिवार्य होगा।

कोर्ट ने Ministry of External Affairs को भी मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है, ताकि महिला को बांग्लादेश में locate कर भारत वापस लाने के प्रयास किए जा सकें।

मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी।

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