Facebook India आवश्यक पक्षकार नहीं, Meta ही Facebook को नियंत्रित करती है: गुहाटी हाईकोर्ट
गौहाटी हाईकोर्ट ने कहा है कि Facebook पर कथित मानहानिकारक सामग्री से जुड़े मुकदमे में Facebook India आवश्यक पक्षकार नहीं है, क्योंकि Facebook सेवा को Meta नियंत्रित करती है और Meta पहले से ही मामले में पक्षकार है।
जस्टिस सुस्मिता फुकन खौंड ने कहा कि Facebook India न तो Facebook सेवा का संचालन या नियंत्रण करती है, न किसी सर्वर की मालिक या संचालक है और न ही प्लेटफॉर्म पर मौजूद सामग्री को होस्ट करती है।
अदालत ने कहा, “Meta Facebook की सभी गतिविधियों को नियंत्रित करती है। इसलिए Facebook इस मुकदमे में आवश्यक पक्षकार नहीं हो सकती।”
यह मामला अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू द्वारा दायर मानहानि के मुकदमे से जुड़ा है। उन्होंने Awadh TV Group, आकाश रवीन्द्र शुक्ला और अन्य सोशल मीडिया संस्थाओं के खिलाफ मुकदमा दायर कर Facebook पेजों, Twitter हैंडल्स और वेबसाइटों पर उनके खिलाफ कथित मानहानिकारक सामग्री प्रकाशित किए जाने का आरोप लगाया था। उन्होंने सामग्री हटाने के साथ 20 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की थी।
Facebook India ने Order I Rule 10(2) CPC के तहत अपना नाम पक्षकारों की सूची से हटाने की मांग की थी, लेकिन Civil Judge (Senior Division), Yupia ने 1 अप्रैल 2025 को उसकी अर्जी खारिज कर दी।
इसके बाद Facebook India ने संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत हाईकोर्ट का रुख किया।
हाईकोर्ट ने कहा कि Meta संबंधित डेटा कंट्रोलर है और पहले से ही मुकदमे में पक्षकार है। Facebook India के पास कथित सामग्री के संबंध में कार्रवाई करने की क्षमता नहीं है, इसलिए मामले के पूर्ण और अंतिम निपटारे के लिए उसकी मौजूदगी आवश्यक नहीं है।
हालांकि, हाईकोर्ट ने मानहानि के मूल विवाद पर कोई फैसला नहीं दिया। उसने ट्रायल कोर्ट का 1 अप्रैल 2025 का आदेश रद्द करते हुए Facebook India की अर्जी पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया।