न्यूज़ वीडियो की पूरी तरह से नकल करना 'फेयर डीलिंग' नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने RSY न्यूज़ के खिलाफ कॉपीराइट मामले में ANI को राहत दी
दिल्ली हाईकोर्ट ने माना कि मौजूदा घटनाओं की रिपोर्टिंग के लिए कॉपीराइट वाले न्यूज़ वीडियो की पूरी तरह से नकल करना 'फेयर डीलिंग' नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने RSY न्यूज़ के खिलाफ कॉपीराइट उल्लंघन के मामले में न्यूज़ एजेंसी एशियन न्यूज़ इंटरनेशनल (ANI) के पक्ष में फैसला सुनाया।
जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने ANI मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में समरी जजमेंट (संक्षिप्त फैसला) सुनाया। यह मामला RSY न्यूज़ द्वारा चार YouTube चैनलों पर न्यूज़ एजेंसी के वीडियो कंटेंट की बिना इजाज़त नकल करने से जुड़ा था।
कोर्ट ने पाया कि RSY न्यूज़ द्वारा अपलोड किए गए बारह में से दस वीडियो में संबंधित ANI वीडियो की या तो पूरी तरह से या लगभग पूरी तरह से नकल की गई।
कोर्ट ने यह भी पाया कि एक और उल्लंघन करने वाले वीडियो में ANI के एक वीडियो के पांच मिनट से ज़्यादा के लगातार हिस्से की नकल की गई।
कोर्ट ने कहा कि अपने YouTube चैनलों पर इन वीडियो को अपलोड करके, RSY न्यूज़ ने ANI की सिनेमैटोग्राफ फिल्मों की नकल की और उन्हें जनता तक पहुंचाया; ये दोनों ही काम न्यूज़ एजेंसी के विशेष अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
जस्टिस कौरव ने गौर किया कि RSY न्यूज़ ने एकमात्र तर्क यह दिया कि उसके पास 'स्वामी एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड' से कथित तौर पर लाइसेंस था, जिसका दावा उसने YouTube प्लेटफॉर्म पर अपने काउंटर-नोटिफिकेशन में किया।
कोर्ट ने पाया कि ऐसे लाइसेंस का होना RSY न्यूज़ की जानकारी में था, लेकिन नोटिस मिलने के बावजूद न तो वह कोर्ट के सामने पेश हुआ और न ही उसने लाइसेंस पेश किया। कोर्ट ने कहा कि ऐसा बचाव मनगढ़ंत था, वास्तविक नहीं।
कोर्ट ने कहा,
"कॉपीराइट एक्ट की धारा 52(1)(a)(iii) के तहत मौजूदा घटनाओं की रिपोर्टिंग के लिए इस इस्तेमाल को 'फेयर डीलिंग' नहीं माना जा सकता। दस वीडियो की पूरी तरह से नकल करना वादी (ANI) के काम का विकल्प बन जाता है।"
ANI ने दस ओरिजिनल वीडियो पर कॉपीराइट का दावा किया, जिनमें राजनेताओं और सार्वजनिक हस्तियों के इंटरव्यू, राजनीतिक कार्यक्रमों की रिकॉर्डिंग और न्यूज़ रिपोर्ट शामिल थीं। आरोप है कि RSY न्यूज़ ने अगस्त और अक्टूबर 2024 के बीच बारह वीडियो अपलोड किए और बिना किसी लाइसेंस या अनुमति के ANI के कंटेंट की नकल की।
कोर्ट ने ANI द्वारा रिकॉर्ड पर रखे गए फ्रेम-दर-फ्रेम तुलनात्मक विवरण पर भी ध्यान दिया। कोर्ट ने देखा कि उल्लंघन करने वाले वीडियो में माइक्रोफ़ोन और ऑन-स्क्रीन ग्राफ़िक्स पर ANI का लोगो बना हुआ था, जबकि फ़्रेम के ऊपर RSY News का मार्क लगाया गया था। कोर्ट ने यह भी पाया कि कुछ फ़्रेम में "Source: ANI" (स्रोत: ANI) भी लिखा था।
बता दें, ANI ने YouTube के कॉपीराइट सुरक्षा सिस्टम का इस्तेमाल किया, जिसके बाद प्लेटफ़ॉर्म ने उल्लंघन करने वाले वीडियो हटा दिए। 2024 में बेंच ने RSY News को ANI के कॉपीराइट वाले कंटेंट का इस्तेमाल करने से रोकने के लिए एकतरफ़ा अंतरिम रोक (ex parte interim injunction) का आदेश दिया और YouTube को उल्लंघन करने वाले वीडियो हटाने, ब्लॉक करने और उन तक पहुँच बंद करने का निर्देश दिया।
मुकदमे की सूचना मिलने के बावजूद, RSY News न तो कोर्ट में पेश हुआ और न ही कोई लिखित बयान दाखिल किया, इसलिए उनके खिलाफ़ एकतरफ़ा (ex parte) कार्रवाई की गई।
मुकदमा समाप्त करते हुए कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि RSY News के पास "दावे का सफलतापूर्वक बचाव करने की कोई वास्तविक संभावना नहीं थी" और मामले को ट्रायल तक ले जाने का कोई ठोस कारण नहीं था।
यह मानते हुए कि ओरिजिनल वीडियो के कॉपीराइट का मालिक ANI है, कोर्ट ने RSY News, उसके मालिकों, भागीदारों, निदेशकों, अधिकारियों, एजेंटों और उसकी ओर से काम करने वाले लोगों को बिना अनुमति के ANI के ओरिजिनल वीडियो या अन्य कॉपीराइट वाले कंटेंट को कॉपी करने, अपलोड करने, प्रकाशित करने, जनता तक पहुँचाने, वितरित करने या किसी अन्य तरह से इस्तेमाल करने से स्थायी रूप से रोक दिया।
कोर्ट ने RSY News को अपने चार YouTube चैनलों—RSY News, RSY News UP, RSY News Delhi और RSY News Bihar—सहित सभी प्लेटफ़ॉर्म से उल्लंघन करने वाले बारह वीडियो हटाने का निर्देश भी दिया।
कोर्ट ने Google LLC (जो YouTube चलाता है) को दिए गए उन निर्देशों को भी पक्का (Absolute) कर दिया, जिनमें उल्लंघन करने वाले पहचाने गए URL को हटाने, ब्लॉक करने और उन तक पहुँच बंद करने के लिए कहा गया।
हालांकि, कोर्ट ने ANI की उस मांग को ठुकरा दिया, जिसमें RSY News से यह सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने को कहा गया कि उसने गैर-कानूनी तरीके से वीडियो कॉपी किए, साथ ही 2 करोड़ रुपये के हर्जाने का दावा भी खारिज किया।
Case Title : ANI MEDIA PVT LTD v. RSY NEWS