'स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में नैतिकता को अपराध से अलग रखना होगा': दिल्ली हाईकोर्ट ने बलात्कार के आरोपी को ज़मानत देते हुए कहा
दिल्ली हाईकोर्ट ने रेप के मामले में आरोपी जिम ट्रेनर को ज़मानत दी। कोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए ज़मानत दी कि "व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े सवालों पर फ़ैसला करते समय नैतिकता को अपराध से अलग रखना होगा।"
जस्टिस गिरीश कथपालिया ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(2), 351(2), 64(2)(m) और 79 के तहत आने वाले अपराधों के संबंध में नियमित ज़मानत याचिका मंज़ूर करते हुए यह टिप्पणी की।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी जिम ट्रेनर के तौर पर काम करता था, उसकी मुलाक़ात पीड़िता से तब हुई जब वह उसके जिम आने लगी। आरोप है कि उसने पीड़िता को नशीला पेय पिलाया, जिसके बाद वह बेहोश हो गई। उसे एक होटल ले जाया गया, जहां कथित तौर पर आरोपी ने उसके साथ रेप किया और उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें खींचीं।
पीड़िता ने आगे आरोप लगाया कि आरोपी ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें वायरल करने की धमकी देकर बार-बार उसका यौन उत्पीड़न किया और उससे पैसे भी ऐंठे।
ज़मानत की गुहार लगाते हुए आरोपी ने दलील दी कि दोनों के बीच का रिश्ता पूरी तरह से आपसी सहमति पर आधारित था और FIR तभी दर्ज कराई गई, जब उनके रिश्ते में खटास आ गई। बचाव पक्ष ने कोर्ट के सामने तस्वीरें और वीडियो भी पेश किए, यह साबित करने के लिए कि आरोपी और पीड़िता के बीच "रोमांटिक रिश्ता" था।
कोर्ट ने पाया कि किसी भी तस्वीर या वीडियो में कोई अश्लील या आपत्तिजनक सामग्री नहीं थी। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि ये तस्वीरें और वीडियो पहली नज़र में आरोपी के इस दावे का समर्थन करते हैं कि उनके बीच का रिश्ता आपसी सहमति पर आधारित था।
कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि पीड़िता 30 साल की पेशेवर वकील है, जो "अपने लिए क्या सही है, इस बात से पूरी तरह वाकिफ़ है", और वह न तो कोई नाबालिग है और न ही कोई अनपढ़ व्यक्ति। कोर्ट ने आगे कहा कि पीड़िता ने यह आरोप नहीं लगाया कि यह रिश्ता शादी के झूठे वादे के आधार पर बनाया गया।
सुनवाई के दौरान, अभियोजन पक्ष ने इस आधार पर ज़मानत याचिका का विरोध किया कि आरोपी शादीशुदा है और उसका एक बच्चा भी है। वह शादी के बाहर किसी और के साथ रिश्ते में शामिल था। यह दलील भी दी गई कि आरोपी और पीड़िता अलग-अलग धर्मों से ताल्लुक रखते हैं।
इन दलीलों को खारिज करते हुए कोर्ट ने टिप्पणी की:
"नैतिकता को अपराध से अलग रखना होगा, और वह भी तब, जब किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े मामले पर विचार किया जा रहा हो।"
समग्र परिस्थितियों और इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि आरोपी नवंबर 2025 से हिरासत में था, हाईकोर्ट ने उसे ₹10,000 के निजी मुचलके और उतनी ही राशि की एक ज़मानत पेश करने पर ज़मानत दी।
Case title: Sabir v. State