अगर 'गांजा' के साथ पत्तियां और डालियां भी तौली जाएं तो उसकी मात्रा ठीक-ठीक तय नहीं की जा सकती: दिल्ली हाईकोर्ट ने NDPS केस में ज़मानत दी

Update: 2026-03-21 14:37 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस एक्ट, 1985 (NDPS Act) के तहत बुक किए गए दो आरोपियों को ज़मानत दी। कोर्ट ने यह देखते हुए ज़मानत दी कि ज़ब्त किए गए नशीले पदार्थ की मात्रा ठीक-ठीक तय नहीं की जा सकती, क्योंकि उसे सूखी पत्तियों, डालियों और घास जैसी चीज़ों के साथ तौला गया। साथ ही हो सकता है कि ये चीज़ें "गांजा" की कानूनी परिभाषा के दायरे में न आती हों।

जस्टिस प्रतीक जालान ने बताया कि NDPS Act की धारा 2(iii)(b) के तहत "गांजा" को "कैनबिस के पौधे के फूल वाले या फल वाले ऊपरी हिस्सों" के तौर पर परिभाषित किया गया। इस परिभाषा में बीज और पत्तियां तब शामिल नहीं होतीं, जब वे पौधे के ऊपरी हिस्सों के साथ न हों।

इस मामले में ज़ब्ती मेमो और FIR में बरामद सामान को सूखी डालियों, पत्तियों और घास जैसी चीज़ों का मिश्रण बताया गया, लेकिन उसमें कहीं भी साफ़ तौर पर फूल वाले या फल वाले ऊपरी हिस्सों की मौजूदगी का ज़िक्र नहीं था।

कोर्ट ने कहा,

"मेरा मानना ​​है कि इस मामले में नशीले पदार्थ की मात्रा को इस स्तर पर ठीक-ठीक तय नहीं किया जा सकता, क्योंकि ज़ब्त किए गए सामान को सूखी डालियों, पत्तियों और घास जैसी चीज़ों के साथ तौला गया। साथ ही हो सकता है कि ये चीज़ें 'गांजा' की कानूनी परिभाषा के दायरे में न आती हों।"

कोर्ट ने आगे कहा कि इस अनिश्चितता का सीधा असर NDPS Act की धारा 37 के तहत ज़मानत की सख़्त शर्तों के लागू होने पर पड़ता है।

मात्रा के मुद्दे के अलावा, कोर्ट ने सैंपलिंग की प्रक्रिया में पहली नज़र में कुछ गड़बड़ियों पर भी ध्यान दिया। कोर्ट ने पाया कि NDPS (ज़ब्ती, भंडारण, सैंपलिंग और निपटान) नियम, 2022 के मुताबिक, हर पैकेट से अलग-अलग नमूने नहीं लिए गए। इसके बजाय, ऐसा लग रहा था कि नमूने सामूहिक रूप से लिए गए, जिससे एक्ट की धारा 52A के पालन पर संदेह पैदा होता है।

कोर्ट ने कहा,

"...सैंपलिंग की प्रक्रिया और 'गांजा' की कानूनी परिभाषा के पालन से जुड़े ये दोनों मुद्दे, आख़िरकार ट्रायल (मुकदमे) के दौरान ही तय किए जाएंगे। हालांकि, 'मोहम्मद मुस्लिम' मामले के आधार पर की गई पहली नज़र की जांच से मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि याचिकाकर्ताओं को ट्रायल के दौरान उनकी आज़ादी से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।"

बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने 'मोहम्मद' मुस्लिम बनाम राज्य (NCT of Delhi)20 मामले में यह साफ़ किया गया कि NDPS Act की धारा 37 की शर्तों का फ़ैसला पहली नज़र में बनने वाले मामले (Prima Facie Case) के आधार पर किया जाना चाहिए, न कि शब्दों के शाब्दिक अर्थ के आधार पर; क्योंकि ऐसा करने पर अदालत को ज़मानत देते समय इस बात से पूरी तरह संतुष्ट होना पड़ेगा कि आरोपी ने वह अपराध नहीं किया, जिसका उस पर आरोप है।

इन बातों पर विचार करते हुए अदालत ने यह फ़ैसला दिया कि आरोपी ने ज़मानत पाने के लिए ज़रूरी आधार पेश किया।

Case title: Manjay Kumar v. State

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