वकील ने दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर मालवीय नगर अग्निकांड पर स्वतः संज्ञान लेने की मांग की
एक वकील ने दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को खुला पत्र लिखकर राजधानी में हाल ही में हुई मालवीय नगर अग्निकांड की घटना पर स्वतः संज्ञान लेने और घटना की जांच की न्यायिक निगरानी की मांग की।
पत्र में वकील भविष्य शाक्य ने हाईकोर्ट से आग्रह किया कि आग लगने के कारणों की निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच सुनिश्चित की जाए जिसमें कई लोगों की जान चली गई।
पत्र में कहा गया कि यह त्रासदी दिल्ली में सार्वजनिक सुरक्षा कानूनों के कार्यान्वयन, नियामक निगरानी और अग्नि सुरक्षा मानदंडों के अनुपालन के संबंध में गंभीर चिंताएं पैदा करती है।
पिछले हफ्ते शहर के भीड़भाड़ वाले हौज रानी इलाके में फ्लोरिश स्टे बी एंड बी' (Flourish Stay B&B) में आग लगने से 21 लोगों की मौत हो गई।
होटल के मालिक को दिल्ली की एक अदालत ने 4 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा था, जिसे बाद में 2 दिन और बढ़ा दिया गया। होटल के रसोइए की जमानत याचिका दिल्ली की अदालत ने खारिज कर दी है और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में है।
अपने पत्र में शाक्य ने कहा कि इस घटना में न केवल निजी व्यक्तियों द्वारा संभावित उल्लंघनों की जांच की जानी चाहिए, बल्कि सुरक्षा मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार नियामक प्राधिकरणों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
उपहार सिनेमा त्रासदी का उदाहरण देते हुए पत्र में कहा गया कि बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान अक्सर निजी लापरवाही के अलावा प्रणालीगत नियामक विफलताओं और संस्थागत खामियों के कारण होता है।
पत्र में कहा गया,
"इस त्रासदी में गई जानें वापस नहीं लाई जा सकतीं। हालांकि न्याय की मांग है कि सच्चाई सामने आए, जहां भी आवश्यक हो जिम्मेदारी तय की जाए। ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए सार्थक सुधार किए जाएं। प्रभावित परिवार जवाब पाने के हकदार हैं, दिल्ली के नागरिक जवाबदेही के हकदार हैं और कानून का शासन यह मांग करता है कि सार्वजनिक सुरक्षा दायित्वों को गंभीरता और ईमानदारी के साथ लागू किया जाए।"
वकील ने ऑनलाइन आवास बुकिंग प्लेटफॉर्म की भूमिका की जांच की भी मांग की, जिसमें होटल, गेस्ट हाउस और इसी तरह के प्रतिष्ठानों को सूचीबद्ध करने वाले प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
अन्य राहतों के अलावा, पत्र में हाईकोर्ट से स्वतंत्र जांच का निर्देश देने, संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी की जांच करने और परिसर से संबंधित निरीक्षण और अनुपालन रिकॉर्ड का खुलासा करने का आदेश देने का अनुरोध किया गया।
इसमें जहां भी आवश्यक हो आपराधिक कार्यवाही दर्ज करने और व्यावसायिक आवास प्रतिष्ठानों के शहर-व्यापी ऑडिट की भी मांग की गई। दिल्ली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या) और 326 (आग से नुकसान पहुँचाना) के तहत होटल के मालिक के खिलाफ FIR दर्ज की।
कम-से-कम 58 लोगों को बचाकर अस्पताल ले जाया गया, जहां 21 लोगों को मृत घोषित कर दिया गया।
अधिकारियों के अनुसार यह होटल एक तंग गली में बिना फायर NOC के चल रहा था। इस घटना में कम-से-कम 21 लोगों की मौत हो गई जिनमें कुछ अफ्रीकी नागरिक और कुछ तुर्कमेनिस्तान के लोग शामिल थे।
खबरों के मुताबिक जिस इमारत में यह होटल चल रहा था, उसमें सिर्फ़ छह कमरों की मंज़ूरी थी लेकिन वहां 20 से ज़्यादा कमरे चल रहे थे और आने-जाने के लिए सिर्फ़ एक ही रास्ता था।