तिहाड़ जेल वार्डन पर मारपीट का आरोप: उम्रकैद की सज़ा काट रहे कैदी के मामले में हाईकोर्ट ने CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश दिया

Update: 2026-07-21 13:16 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट ने तिहाड़ जेल के एक हेड वार्डन को व्यक्तिगत रूप से पेश होने और CCTV फुटेज सुरक्षित रखने व उसे पेश करने का आदेश दिया। यह आदेश तब दिया गया, जब वहां उम्रकैद की सज़ा काट रहे एक कैदी ने आरोप लगाया कि हिरासत में उसके साथ मारपीट की गई और उसे इलाज नहीं दिया गया। [2026 LiveLaw (Del) 670]

जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और विकास महाजन की डिवीज़न बेंच ने ये निर्देश तब दिए, जब वह आशीष उर्फ ​​विक्की की अर्ज़ी पर सुनवाई कर रहे थे। विक्की ने POCSO मामले में अपनी सज़ा के खिलाफ अपील के दौरान ज़मानत, सज़ा पर अंतरिम रोक और तुरंत मेडिकल जांच की मांग की थी।

अपीलकर्ता तिहाड़ की सेंट्रल जेल नंबर 3 में बंद है। उसने आरोप लगाया कि 26 जून, 2026 को सुबह 7 बजे से 11 बजे के बीच हेड वार्डन सागर ने उसके साथ मारपीट की, जिससे उसके हाथ में गंभीर चोटें आईं। उसने यह भी दावा किया कि वार्डन ने पहले गैर-कानूनी "प्रोटेक्शन मनी" (सुरक्षा के नाम पर पैसे) की मांग की थी और यह मारपीट तब हुई जब उसने मांग पूरी करने में असमर्थता जताई।

याचिका के अनुसार, बार-बार मेडिकल मदद मांगने के बावजूद, अपीलकर्ता को सही इलाज नहीं मिला और उसके हाथों में दर्द और सूजन बनी रही। उसने संबंधित बैरक और आस-पास के इलाकों के CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने के निर्देश भी मांगे, क्योंकि उसे डर था कि फुटेज को ओवरराइट (मिटाकर नया रिकॉर्ड) किया जा सकता है।

अपीलकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि कैदी को गंभीर चोटें आई हैं और आशंका है कि उसका हाथ फ्रैक्चर हो गया। यह भी बताया गया कि उसी घटना के दौरान दो अन्य कैदियों के साथ भी मारपीट की गई।

यह देखते हुए कि आरोप, अगर सच हैं, तो "बेहद चिंताजनक" हैं, कोर्ट ने आदेश दिया कि घटना से संबंधित CCTV फुटेज को सुरक्षित रखा जाए और सुनवाई की अगली तारीख पर कोर्ट के सामने पेश किया जाए।

कोर्ट ने हेड वार्डन को व्यक्तिगत रूप से पेश होने और विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का भी आदेश दिया, जिसमें घटना के बारे में उनका पक्ष और अपीलकर्ता व अन्य कैदियों की मौजूदा मेडिकल स्थिति की जानकारी हो।

कोर्ट ने जेल मेडिकल ऑफिसर को भी निर्देश दिया कि वे अपीलकर्ता की मेडिकल जांच, इलाज और देखभाल के बारे में पूरी रिपोर्ट दें, जिसमें किए गए किसी भी डायग्नोस्टिक टेस्ट का विवरण भी शामिल हो। इसके अलावा, कोर्ट ने आदेश दिया कि अपील करने वाले और घटना में कथित तौर पर घायल हुए दो अन्य कैदियों को उसी दिन दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट के सामने पेश किया जाए ताकि उनकी स्वतंत्र मेडिकल जांच हो सके और रिपोर्ट मिल सके। जेल सुपरिटेंडेंट को यह भी निर्देश दिया गया कि वे आरोपों पर सीलबंद लिफ़ाफ़े में अपना जवाब दाखिल करें।

अब यह मामला 29 जुलाई के लिए लिस्ट किया गया।

Case title: Ashish Alies Vicky v. State

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