विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के चयन ट्रायल में उतरना चाहती हैं विनेश फोगाट, दिल्ली हाईकोर्ट ने WFI से मांगा जवाब
ओलंपिक पहलवान विनेश फोगाट ने 2026 सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के चयन ट्रायल में शामिल होने की अनुमति के लिए बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने मामले में भारतीय कुश्ती महासंघ से निर्देश लेने को कहा और याचिका पर अगली सुनवाई गुरुवार के लिए तय की।
फोगाट ने यह नई अर्जी अपनी लंबित याचिका में दाखिल की। मूल याचिका में उन्होंने गर्भावस्था और मातृत्व अवकाश के बाद खेल में वापसी करने वाली महिला खिलाड़ियों के लिए एक स्पष्ट नीति बनाए जाने की मांग की।
नई अर्जी में फोगाट ने भारतीय कुश्ती महासंघ के सात सितंबर के उस परिपत्र पर रोक लगाने की मांग की, जिसके तहत उन्हें चयन प्रक्रिया से बाहर रखा गया।
उन्होंने अदालत से महासंघ को निर्देश देने की मांग की कि उन्हें फिलहाल पात्र खिलाड़ियों की सूची में शामिल किया जाए और 14 सितंबर को दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में होने वाले महिला चयन ट्रायल में हिस्सा लेने दिया जाए।
ये चयन ट्रायल भारत की उस टीम के चयन के लिए हैं, जिसे 24 अक्टूबर से एक नवंबर तक कजाकिस्तान के अस्ताना में होने वाली 2026 सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में हिस्सा लेना है।
भारतीय कुश्ती महासंघ के परिपत्र के मुताबिक 14 सितंबर को राजधानी में छह ओलंपिक भार वर्गों में महिला पहलवानों के चयन ट्रायल होंगे।
चयन के लिए अलग-अलग प्रतियोगिताओं और शिविरों में प्रदर्शन के आधार पर पात्रता तय की गई।
फोगाट का कहना है कि मौजूदा चयन व्यवस्था ने पात्रता का रास्ता सीमित किया, क्योंकि इसमें निर्धारित प्रतियोगिताओं में भागीदारी और प्रदर्शन को अनिवार्य आधार बनाया गया।
इनमें 2025 सीनियर राष्ट्रीय कुश्ती चैंपियनशिप के पदक विजेता, 2026 सीनियर ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट, 2026 अंडर-23 राष्ट्रीय कुश्ती चैंपियनशिप, निर्धारित फेडरेशन कप के पदक विजेता, राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में शामिल पहलवान और 2026 अंडर-20 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के लिए चुने गए पहलवान शामिल हैं।
फोगाट ने कहा है कि वह इनमें से किसी भी श्रेणी में नहीं आतीं, क्योंकि इन प्रतियोगिताओं से उनकी गैरमौजूदगी गर्भावस्था, बच्चे के जन्म, प्रसव के बाद स्वास्थ्य लाभ और दोबारा प्रतियोगिता में लौटने की प्रक्रिया से जुड़ी थी।
उनका तर्क है कि मौजूदा चयन व्यवस्था में ऐसे खिलाड़ी के लिए कोई प्रावधान नहीं है, जो मातृत्व संबंधी कारणों से निर्धारित प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं ले सकी हो। ऐसे में केवल उन प्रतियोगिताओं में उनकी
अनुपस्थिति को आधार बनाकर उन्हें चयन ट्रायल से बाहर करना उचित नहीं है, जिनमें वह उस समय हिस्सा लेने की स्थिति में नहीं थीं।
फोगाट ने अपनी अर्जी में 30 मई को 53 किलोग्राम भार वर्ग में हुए एशियाई खेल चयन ट्रायल का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने क्वार्टर फाइनल मुकाबला जीता था और सेमीफाइनल तक पहुंची थीं।
हालांकि, फोगाट ने स्पष्ट किया है कि वह इस प्रदर्शन के आधार पर सीधे चयन का दावा नहीं कर रही हैं।
उनका कहना है कि यह प्रदर्शन केवल इस बात का प्रासंगिक प्रमाण है कि वह प्रतिस्पर्धी कुश्ती में वापसी कर चुकी हैं, इसलिए उन्हें आगामी चयन ट्रायल में शामिल होने का अवसर दिया जाना चाहिए।
अर्जी में कहा गया कि एशियाई खेल चयन ट्रायल में फोगाट का प्रदर्शन इस बात के आकलन में प्रासंगिक है कि उन्हें 14 सितंबर के चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं। इसके बाद अंतिम चयन उनके ट्रायल में प्रदर्शन के आधार पर ही किया जा सकता है।
फोगाट का कहना है कि महासंघ उन प्रतियोगिताओं से उनकी अनुपस्थिति को उनके खिलाफ इस्तेमाल नहीं कर सकता, जिनमें वह मातृत्व संबंधी कारणों से हिस्सा नहीं ले सकी थीं। साथ ही उस बाद के प्रदर्शन को नजरअंदाज नहीं कर सकता, जब उन्हें दोबारा प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिला।