घरेलू LPG सिलेंडर रिफिल बुक करने के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण अनिवार्य किए जाने के केंद्र सरकार के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। याचिका में दावा किया गया है कि 1 अक्टूबर से विनियमित कीमत पर घरेलू LPG रिफिल लेने के लिए बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य करने के फैसले से करीब 3.16 करोड़ उपभोक्ता प्रभावित हो सकते हैं, जिन्होंने अब तक प्रमाणीकरण पूरा नहीं किया।

चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीजन बेंच ने याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार का पक्ष पूछा है। कोर्ट ने केंद्र की ओर से पेश वकील को मामले में निर्देश प्राप्त करने को कहा। अब मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी।

याचिका एडवोकेट पुलकित लूथरा ने दाखिल की है, जिनकी ओर से सीनियर एडवोकेट पराग त्रिपाठी पेश हुए। याचिकाकर्ता ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के 17 सितंबर के पत्र और 19 सितंबर की प्रेस विज्ञप्ति को चुनौती दी। इन निर्देशों के तहत घरेलू LPG उपभोक्ताओं के लिए बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य किया गया।

याचिकाकर्ता का कहना है कि यह फैसला मनमाना और अनुपातहीन है तथा संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन करता है। उनका तर्क है कि जो उपभोक्ता बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण पूरा करने में सक्षम नहीं हैं या ऐसा नहीं करना चाहते उन्हें विनियमित खुदरा कीमत पर सामान्य घरेलू LPG सिलेंडर मिलने से वंचित किया जा सकता है।

याचिका के अनुसार मंत्रालय ने तेल विपणन कंपनियों को उन उपभोक्ताओं के LPG रिफिल पर रोक लगाने का निर्देश दिया है, जिन्होंने बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण पूरा नहीं किया।

इसके बाद 19 सितंबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि जो उपभोक्ता प्रमाणीकरण पूरा करने में सक्षम नहीं हैं या इसे पूरा नहीं करना चाहते, वे उपलब्धता के आधार पर 5 या 10 किलोग्राम के सिलेंडर बाजार कीमत पर ले सकते हैं।

याचिकाकर्ता ने इस विकल्प को पर्याप्त नहीं बताया है। उनका कहना है कि इस व्यवस्था के तहत ऐसे उपभोक्ताओं को सामान्य 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर को बाजार कीमत पर भी खरीदने की सुविधा नहीं दी गई।

याचिका में दावा किया गया कि 14 सितंबर तक करीब 3.16 करोड़ घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं ने बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण पूरा नहीं किया। याचिकाकर्ता का कहना है कि नई व्यवस्था का सबसे अधिक असर बुजुर्गों, दिव्यांगों और अन्य कमजोर वर्गों के उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है, जिन्हें प्रमाणीकरण प्रक्रिया पूरी करने में व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

याचिका में यह भी कहा गया कि लगातार बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण विफल होने की स्थिति में उपभोक्ताओं के लिए कोई स्पष्ट, समान और आसानी से उपलब्ध वैकल्पिक व्यवस्था निर्धारित नहीं की गई। याचिकाकर्ता के अनुसार, केवल वैकल्पिक माध्यम उपलब्ध कराने की बात पर्याप्त नहीं है, जब तक सफल बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की मूल शर्त बनी रहती है।

याचिकाकर्ता ने अपनी व्यक्तिगत कठिनाइयों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया है कि वह दाहिनी आंख की माइक्रोफ्थैल्मिया और बाईं आंख में आंशिक ऑप्टिक एट्रॉफी से पीड़ित हैं। उनका दावा है कि आंख की पुतली के आधार पर होने वाली पहचान प्रक्रिया में आंखें खुली रखने और पलक झपकाने की जरूरत होती है, जिससे दृष्टिबाधित लोगों को काफी परेशानी हो सकती है।

याचिका में कहा गया कि केंद्र सरकार के नए निर्देश पहले की व्यवस्था से अलग हैं और एक आवश्यक सार्वजनिक सुविधा तक पहुंच पर नई पाबंदी लगाते हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि ऐसे लोगों के लिए प्रभावी वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई गई, जो दिव्यांगता या अन्य कारणों से बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण पूरा नहीं कर सकते।

याचिका में आधार अधिनियम की धारा 7 का भी हवाला दिया गया। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह प्रावधान समेकित निधि से वित्त पोषित सब्सिडी, लाभ या सेवाओं से संबंधित आधार प्रमाणीकरण की अनुमति देता है, लेकिन घरेलू LPG की विनियमित कीमत पर आपूर्ति के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण को अनिवार्य शर्त बनाने का अधिकार नहीं देता।

याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया कि संबंधित निर्देशों के लिए पर्याप्त वैधानिक आधार नहीं है और वे निजता के मौलिक अधिकार से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसले के सिद्धांतों के विपरीत हैं।

जनहित याचिका में मंत्रालय के 17 सितंबर के पत्र और 19 सितंबर की प्रेस विज्ञप्ति को उस सीमा तक रद्द करने की मांग की गई, जहां वे विनियमित कीमत पर घरेलू LPG रिफिल बुक करने के लिए बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण को अनिवार्य बनाते हैं और प्रमाणीकरण पूरा नहीं करने वाले उपभोक्ताओं के रिफिल पर रोक लगाने की अनुमति देते हैं।

याचिका में ऐसे उपभोक्ताओं के लिए वैकल्पिक पहचान माध्यम उपलब्ध कराने का निर्देश देने की भी मांग की गई, जो बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण पूरा करने में असमर्थ हैं।

अंतरिम आवेदन में याचिकाकर्ता ने नए निर्देशों के अमल पर रोक लगाने की मांग की। साथ ही उन उपभोक्ताओं के LPG कनेक्शन या रिफिल पर रोक नहीं लगाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया, जो प्रमाणीकरण पूरा नहीं कर पाए।

याचिका में यह भी मांग की गई कि दिव्यांगता, उम्र, बीमारी, चोट या बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण में विफलता के कारण प्रमाणीकरण पूरा नहीं कर पाने वाले पात्र उपभोक्ताओं को 14.2 किलोग्राम का सामान्य घरेलू LPG सिलेंडर विनियमित कीमत पर उपलब्ध कराया जाता रहे।

मामले में अब केंद्र सरकार का जवाब आने के बाद हाईकोर्ट आगे की सुनवाई करेगा।

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