दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि स्थानीय निवासियों के कल्याण के लिए किसी पार्क को हरित और मनोरंजन स्थल के रूप में बनाए रखने की जरूरत, वहां कुछ समय के लिए रामलीला आयोजित करने की जरूरत से अधिक महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने नारायणा विहार स्थित चिंटू पार्क में रामलीला आयोजित करने के लिए की गई बुकिंग रद्द किए जाने के खिलाफ दाखिल याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।

जस्टिस जस्मीत सिंह ने श्री सनातन धर्म रामलीला समिति की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली विकास प्राधिकरण यानी DDA का फैसला बरकरार रखा, जिसके तहत चिंटू पार्क की रामलीला आयोजन के लिए की गई बुकिंग रद्द कर दी गई। समिति 30 सितंबर से 25 अक्टूबर तक पार्क में रामलीला आयोजित करना चाहती थी।

याचिकाकर्ता के अनुसार समिति कई दशकों से इसी स्थान पर हर साल रामलीला का आयोजन करती आ रही है। समिति का दावा था कि आयोजन के लिए उसके पास संबंधित अधिकारियों से जरूरी अनुमति और अनापत्ति प्रमाणपत्र भी मौजूद हैं।

हालांकि DDA ने 9 सितंबर को रामलीला के लिए की गई बुकिंग रद्द की थी। बुकिंग रद्द करने के कारण के तौर पर आदेश में लिखा गया, “माननीय हाईकोर्ट के निर्देशों के कारण रद्द।”

समिति ने आरोप लगाया कि बुकिंग रद्द करने से पहले उसे न तो कोई नोटिस दिया गया, न सुनवाई का मौका मिला और न ही फैसले के कारण बताए गए।

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि पहले की एक रिट याचिका में हाईकोर्ट के निर्देश पार्क से अतिक्रमण हटाने, वहां पार्किंग रोकने और उसे हरित क्षेत्र के तौर पर बनाए रखने से संबंधित थे। इन निर्देशों में पार्क में रामलीला या किसी धार्मिक कार्यक्रम के आयोजन पर रोक नहीं लगाई गई।

इसके विपरीत DDA की ओर से कहा गया कि पिछली कार्यवाही में 5 जनवरी को पारित आदेश के बाद चिंटू पार्क को नारायणा विहार कॉलोनी के निवासियों के कल्याण के लिए पार्क के रूप में बनाए रखा जा रहा है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने पार्क की मौजूदा स्थिति और उसके इस्तेमाल से संबंधित तस्वीरें तथा स्टेटस रिपोर्ट भी पेश की गई।

DDA की दलील स्वीकार करते हुए कोर्ट ने कहा कि नारायणा विहार के निवासियों के कल्याण के लिए चिंटू पार्क को हरित और मनोरंजन स्थल के रूप में बनाए रखने की जरूरत, रामलीला आयोजित करने के लिए उसके अस्थायी इस्तेमाल से अधिक महत्वपूर्ण है।

कोर्ट ने कहा कि पिछली कार्यवाही में पारित आदेश पार्क में अतिक्रमण और अन्य अनधिकृत इस्तेमाल के संदर्भ में थे। उन आदेशों के जरिए पार्क को दोबारा व्यवस्थित करने और स्थानीय निवासियों के लाभ के लिए उसका रखरखाव सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

हाईकोर्ट ने 19 अगस्त को पारित एक अन्य आदेश का भी उल्लेख किया। इसमें कहा गया कि जब तक इस जमीन का इस्तेमाल उसके निर्धारित उद्देश्य यानी सामुदायिक केंद्र या वृद्धाश्रम के रूप में नहीं किया जाता, तब तक उसे हरित क्षेत्र के रूप में बनाए रखा जाए।

जस्टिस जस्मीत सिंह ने कहा कि मौजूदा मामले के तथ्यों और परिस्थितियों में चिंटू पार्क को नारायणा विहार के निवासियों के कल्याण के लिए हरित और मनोरंजन स्थल के रूप में बनाए रखने की जरूरत को रामलीला के अस्थायी आयोजन से अधिक प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

कोर्ट ने याचिकाकर्ता की उस दलील को भी स्वीकार नहीं किया कि रामलीला का आयोजन केवल पार्क में पहले से मौजूद मंच वाले हिस्से के अस्थायी इस्तेमाल तक सीमित रहेगा।

कोर्ट ने कहा कि रामलीला आयोजित करने के लिए बड़ी संख्या में लोगों को पार्क में अस्थायी रूप से लाना होगा। इसके अलावा आयोजन से जुड़ी विभिन्न संरचनाओं और सुविधाओं को भी स्थापित करना और इस्तेमाल करना पड़ेगा। ऐसे में इसे केवल मौजूदा मंच के सीमित और अस्थायी इस्तेमाल के तौर पर नहीं देखा जा सकता।

हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में उसे रामलीला आयोजित करने की समिति की मांग और नारायणा विहार के निवासियों के कल्याण तथा उनके इस्तेमाल के लिए पार्क को बनाए रखने की व्यापक जरूरत के बीच संतुलन बनाना होगा। मौजूदा मामले में पार्क को निवासियों के लिए बनाए रखने की जरूरत याचिकाकर्ता के अस्थायी इस्तेमाल के दावे से अधिक महत्वपूर्ण है।

इसी आधार पर कोर्ट ने कहा कि संबंधित अवधि के दौरान पार्क में रामलीला आयोजित करने की अनुमति देने के लिए कोई निर्देश जारी नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि DDA के वकील के अनुसार रामलीला आयोजित करने के लिए इलाके में कई अन्य स्थान उपलब्ध हैं। इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने याचिका पर विचार करने का कोई आधार नहीं पाया और उसे खारिज किया।

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