ऐप आधारित कैब और बाइक-टैक्सी में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र-दिल्ली सरकार समेत कंपनियों को नोटिस
दिल्ली हाईकोर्ट ने ऐप आधारित कैब, बाइक-टैक्सी और अन्य राइड सेवा इस्तेमाल करने वाली महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए मजबूत और एक समान सुरक्षा व्यवस्था की मांग वाली जनहित याचिका पर बुधवार को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस और उबर इंडिया, रोप्पेन ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज तथा एएनआई टेक्नोलॉजीज यानी ओला कैब्स से जवाब मांगा।
चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीजन बेंच ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई की। याचिका आदित्य सहगल की ओर से दाखिल की गई। इसमें ऐप आधारित परिवहन सेवा देने वाली कंपनियों के लिए मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करने और अनिवार्य सुरक्षा नियम तथा मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी तैयार करने की मांग की गई।
याचिका में उबर, रैपिडो और इसी तरह की अन्य ऐप आधारित परिवहन सेवाओं के लिए समान और अनिवार्य सुरक्षा प्रोटोकॉल बनाने की मांग की गई। याचिकाकर्ता ने ड्राइवरों के सत्यापन, उनके आपराधिक रिकॉर्ड की जांच, ड्राइवर और वाहन की पहचान, तय रास्ते से अलग जाने, आपात स्थिति में प्रतिक्रिया, शिकायतों के निपटारे, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और परिवहन कंपनियों तथा कानून लागू करने वाली एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय से जुड़े मुद्दे उठाए।
याचिका के अनुसार इन सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर पहले उबर इंडिया सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड, रोप्पेन ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड यानी रैपिडो और दिल्ली के पुलिस आयुक्त के समक्ष भी अभ्यावेदन दिए गए। याचिकाकर्ता का कहना है कि इन अभ्यावेदनों पर मिले जवाबों में उठाई गई विशिष्ट चिंताओं का पर्याप्त रूप से समाधान नहीं किया गया।
याचिका में मीडिया में सामने आई महिला यात्रियों से जुड़ी विभिन्न घटनाओं का भी हवाला दिया गया। इनमें यात्रा के दौरान तय मार्ग से अलग रास्ते पर ले जाने, अनुचित व्यवहार, धमकी, उत्पीड़न, ड्राइवर के गलत आचरण और यात्रा खत्म होने के बाद संपर्क करने जैसे आरोपों से संबंधित घटनाएं शामिल हैं।
याचिकाकर्ता ने मांग की कि ऐप पर जिस ड्राइवर और वाहन की जानकारी दिखाई जाए यात्रा के दौरान वही ड्राइवर और वही वाहन यात्री को उपलब्ध कराया जाए। किसी ड्राइवर या वाहन को बिना अनुमति बदलने को सुरक्षा से जुड़ी घटना माना जाए और ऐसी स्थिति में यात्री को बिना किसी आर्थिक दंड के यात्रा रद्द करने की अनुमति दी जाए।
जनहित याचिका में आपात स्थिति और एसओएस अलर्ट के लिए 24 घंटे और सातों दिन काम करने वाला कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित करने की मांग भी की गई। इस व्यवस्था के जरिए आपातकालीन संदेशों को प्राप्त करने, उनकी निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर तत्काल प्रतिक्रिया देने की व्यवस्था किए जाने की मांग की गई।
याचिका में ड्राइवरों के लिए नियमित और सत्यापन योग्य प्रशिक्षण की भी मांग की गई। इसमें महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता, महिला यात्रियों के साथ उचित व्यवहार, यौन उत्पीड़न की रोकथाम, व्यक्तिगत सीमाओं का सम्मान, आपात परिस्थितियों में व्यवहार और गलत आचरण के परिणामों से जुड़े विषयों को प्रशिक्षण में शामिल करने की बात कही गई।
याचिकाकर्ता का कहना है कि ड्राइवर प्रशिक्षण केवल ऑनलाइन प्रक्रिया या औपचारिक खानापूर्ति तक सीमित नहीं होना चाहिए। प्रशिक्षण वास्तव में दिया गया है या नहीं, इसकी नियमित जांच और सत्यापन की व्यवस्था भी होनी चाहिए।
जनहित याचिका में संवेदनशील, सुनसान और अधिक जोखिम वाले स्थानों पर निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग भी की गई। इसके लिए उपयुक्त निगरानी या गश्ती वाहनों के साथ तकनीकी निगरानी प्रणाली विकसित करने का सुझाव दिया गया। ऐसी तकनीकी व्यवस्था के जरिए संदिग्ध गतिविधियों, लंबे समय तक वाहन के एक स्थान पर रुके रहने और तय मार्ग से महत्वपूर्ण विचलन का पता लगाने की मांग की गई।
याचिका में शिकायतों के निपटारे के लिए समयबद्ध व्यवस्था बनाने की भी मांग की गई। ड्राइवर के गलत आचरण, उत्पीड़न, हमला, तय मार्ग से अलग ले जाने, बिना अनुमति ड्राइवर या वाहन बदलने और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था के विफल होने जैसी शिकायतों पर निर्धारित समयसीमा में कार्रवाई की मांग की गई।
इसके अलावा, जहां मामला पुलिस कार्रवाई की मांग करता हो, वहां शिकायतों को संबंधित पुलिस अधिकारियों तक पहुंचाने और उचित स्तर पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करने की व्यवस्था बनाने का भी अनुरोध किया गया।
हाईकोर्ट ने याचिका में उठाए गए इन मुद्दों पर केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस और संबंधित ऐप आधारित परिवहन कंपनियों को नोटिस जारी किया। मामले में अब संबंधित पक्षों के जवाब के बाद कोर्ट याचिका में मांगी गई सुरक्षा व्यवस्थाओं और प्रस्तावित दिशा-निर्देशों पर आगे विचार करेगा।