दिल्ली हाईकोर्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में बड़ी राहत देते हुए उन्हें दूसरे दो दंगा मामलों में मौजूद कुछ दस्तावेज हासिल करने की अनुमति दी। इन दस्तावेजों में उनके मोबाइल फोन से फॉरेंसिक साइंस लैब यानी FSL द्वारा हासिल किया गया डेटा और कॉल डाटा रिकॉर्ड शामिल हैं। ताहिर हुसैन इन दस्तावेजों का इस्तेमाल अपने बचाव के समर्थन में करना चाहते हैं।

जस्टिस संजीव नरूला ने बुधवार को ट्रायल कोर्ट के वह आदेश रद्द किया, जिसमें ताहिर हुसैन की भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 94 के तहत दाखिल अर्जी खारिज कर दी गई थी। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की सहमति को ध्यान में रखते हुए उन्हें संबंधित दस्तावेज हासिल करने की अनुमति दी। हालांकि यह भी स्पष्ट किया कि इन दस्तावेजों के आधार पर बचाव पक्ष अलग से कोई साक्ष्य पेश नहीं कर सकेगा।

मामला खजूरी खास थाने में दर्ज FIR नंबर 114/2020 से जुड़ा है, जिसमें ताहिर हुसैन फिलहाल ट्रायल का सामना कर रहे हैं। उन्होंने दिल्ली दंगों से जुड़े दो अन्य मामलों में दिल्ली पुलिस के पास मौजूद दस्तावेज इस मामले में अपने बचाव के लिए हासिल करने की मांग की थी।

इन दस्तावेजों में पहला खजूरी खास थाने में दर्ज FIR नंबर 101/2020 से संबंधित है। इसमें ताहिर हुसैन के मोबाइल फोन से एफएसएल द्वारा हासिल किया गया डेटा हार्ड डिस्क में सुरक्षित रखा गया। दूसरा दस्तावेज दयालपुर थाने में दर्ज FIR नंबर 65/2020 से संबंधित उनके कॉल डाटा रिकॉर्ड की प्रमाणित प्रति है।

ताहिर हुसैन की ओर से पेश एडवोकेट राजीव मोहन ने हाईकोर्ट को बताया कि बचाव पक्ष इन दोनों दस्तावेजों को अलग से साक्ष्य के तौर पर पेश नहीं करना चाहता। उनकी मांग केवल यह है कि दस्तावेज उन्हें उपलब्ध कराए जाएं, ताकि FIR नंबर 114/2020 में अपने पक्ष के समर्थन में उनका इस्तेमाल किया जा सके।

बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि ये दस्तावेज संबंधित मामले में ताहिर हुसैन की बेगुनाही साबित करने में मदद कर सकते हैं। इसलिए इन्हें हासिल करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

दिल्ली पुलिस की ओर से पेश विशेष लोक अभियोजक रजत नायर ने निर्देश मिलने के बाद कहा कि यदि ताहिर हुसैन इन दस्तावेजों के आधार पर अलग से साक्ष्य पेश नहीं करना चाहते और केवल अपने बचाव के समर्थन में इन पर भरोसा करना चाहते हैं तो पुलिस को दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग पर कोई आपत्ति नहीं है।

हालांकि, पुलिस ने यह स्पष्ट किया कि दस्तावेज हासिल करने की प्रक्रिया के कारण मौजूदा ट्रायल में देरी नहीं होनी चाहिए। साथ ही इन दोनों दस्तावेजों को लेकर कोई अलग साक्ष्य पेश नहीं किया जाएगा।

दोनों पक्षों की सहमति के बाद हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का पहले का आदेश रद्द किया। कोर्ट ने कहा कि पक्षकारों की सहमति को देखते हुए वह आदेश निरस्त किया जाता है।

हालांकि हाईकोर्ट ने इसके साथ महत्वपूर्ण शर्त भी रखी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बचाव पक्ष इन दोनों दस्तावेजों के आधार पर कोई साक्ष्य पढ़कर रिकॉर्ड पर नहीं ला सकेगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि संबंधित दस्तावेजों पर दोनों पक्षों को सुनने के बाद ट्रायल कोर्ट अपना स्वतंत्र मत बना सकता है।

इस तरह हाईकोर्ट ने ताहिर हुसैन को दूसरे दंगा मामलों से जुड़े फोरेंसिक डेटा और कॉल रिकॉर्ड हासिल करने की अनुमति दे दी, लेकिन यह स्पष्ट किया कि इन दस्तावेजों को हासिल करना अपने आप में उन्हें साक्ष्य के रूप में स्वीकार किए जाने के बराबर नहीं होगा।

अब इन दस्तावेजों का इस्तेमाल FIR नंबर 114/2020 में ताहिर हुसैन के बचाव के समर्थन में किया जा सकेगा, जबकि दस्तावेजों की कानूनी प्रासंगिकता और उनके आधार पर बनने वाले निष्कर्ष पर ट्रायल कोर्ट दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना विचार कर सकेगा।

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