दिल्ली हाईकोर्ट ने छात्रों के लिए निजी पेइंग गेस्ट (PG), किराए के फ्लैट और हॉस्टल में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कॉलेज, विश्वविद्यालय और जिला स्तर पर Student Accommodation Advisory and Monitoring Committees गठित करने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर बुधवार को नोटिस जारी किया।

यह याचिका सत्य निकेतन PG भवन हादसे के बाद दाखिल की गई है। इस हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी, जिनमें पांच छात्र शामिल थे।

चीफ़ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, MCD, दिल्ली पुलिस, गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, UGC, JNU, डॉ. बी.आर. आंबेडकर विश्वविद्यालय और पन्नालाल गिरधरलाल दयानंद कॉलेज समेत संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी।

निजी छात्र आवासों के लिए व्यापक नियामक व्यवस्था की मांग

दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र शिवांश कालिया द्वारा दायर याचिका में दिल्ली सरकार और अन्य संबंधित अधिकारियों को निजी छात्र आवासों के लिए एक व्यापक नियामक ढांचा तैयार करने का निर्देश देने की मांग की गई है।

इसमें भवन की संरचनात्मक सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा, स्वच्छता, रहने योग्य परिस्थितियां और शिकायत निवारण व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

याचिका में कहा गया है कि सत्य निकेतन हादसे ने निजी छात्र आवासों की निगरानी और नियमन में मौजूद कमियों को उजागर किया है। छात्रों की सुरक्षा से जुड़े मामलों के लिए विभिन्न सरकारी और शैक्षणिक संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है।

याचिका के अनुसार, संस्थागत हॉस्टल की सीमित उपलब्धता के कारण बड़ी संख्या में छात्र निजी PG, किराए के फ्लैट और हॉस्टल में रहने को मजबूर हैं।

याचिकाकर्ता का दावा है कि वर्तमान में छात्रों के पास असुरक्षित भवन, उत्पीड़न, शोषण, अधिक किराया या अन्य आवास संबंधी शिकायतों की रिपोर्ट करने के लिए कोई समर्पित व्यवस्था नहीं है।

तीन स्तरों पर कमेटियां बनाने का प्रस्ताव

PIL में कॉलेज, विश्वविद्यालय और प्रमुख छात्र/कोचिंग क्षेत्रों के स्तर पर तीन प्रकार की कमेटियां गठित करने का प्रस्ताव रखा गया है।

इन कमेटियों में शैक्षणिक संस्थानों, छात्रों, पुलिस, नगर निगम, जिला प्रशासन और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों को शामिल करने की मांग की गई है।

याचिका में छात्रों की सहमति और उचित डेटा-सुरक्षा उपायों के अधीन निजी आवासों में रहने वाले छात्रों का स्वैच्छिक डेटाबेस तैयार करने का भी सुझाव दिया गया है।

इसके अलावा, छात्रों की अधिक संख्या वाले क्षेत्रों में सस्ते सरकारी और संस्थागत हॉस्टल बढ़ाने की मांग भी की गई है।

सत्य निकेतन हादसे पर हाईकोर्ट पहले से कर रहा है सुनवाई

सत्य निकेतन हादसे को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट पहले से ही एक अन्य PIL पर सुनवाई कर रहा है। इसमें प्रभावित छात्रों को तत्काल चिकित्सा सुविधा और पुनर्वास, पीड़ितों को मुआवजा, असुरक्षित इमारतों से छात्रों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने और महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग की गई है।

हाईकोर्ट ने हाल ही में प्रभावित छात्रों की जान बचाने के लिए अधिकारियों को प्रयास दोगुने करने को कहा था।

कोर्ट ने MCD को मामले को उच्चतम कार्यकारी स्तर पर उठाने और यह जांच कराने का निर्देश दिया है कि ढही हुई इमारतों का निर्माण वैध अनुमति के तहत हुआ था या नहीं।

कोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि निर्माण वैध अनुमति के बिना पाया जाता है, तो MCD को लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों या कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करनी होगी।

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