दिल्ली दंगा साजिश मामले में उमर खालिद की तीसरी जमानत याचिका पर हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से मांगा जवाब

Update: 2026-07-31 07:00 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट ने वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा व्यापक साजिश मामले में आरोपी उमर खालिद की तीसरी जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

जस्टिस प्रतीभा एम. सिंह और जस्टिस विकास महाजन की खंडपीठ ने दिल्ली पुलिस को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। इसके बाद उमर खालिद को प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया। अदालत ने यह मामला सह-आरोपी शरजील इमाम की समान अपील के साथ 27 अगस्त को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।

उमर खालिद ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम की धारा 21 के तहत निचली अदालत के 4 जुलाई के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनकी जमानत याचिका खारिज की गई।

सुनवाई के दौरान उमर खालिद की ओर से सीनियर एडवोकेट त्रिदीप पेस ने कहा कि नियमित जमानत के साथ-साथ अंतरिम जमानत भी मांगी गई। उन्होंने दलील दी कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के मामलों में जमानत से जुड़े कानूनी प्रश्न को सुप्रीम कोर्ट बड़ी पीठ के पास भेज चुका है। ऐसे में अंतिम निर्णय आने तक उमर खालिद को अंतरिम जमानत दी जानी चाहिए।

वहीं राज्य की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने अदालत को बताया कि इसी मामले में सह-आरोपी शरजील इमाम की अपील पहले से 27 अगस्त को सूचीबद्ध है। उन्होंने अनुरोध किया कि उमर खालिद की अपील भी उसी के साथ सुनी जाए।

दलीलों को रिकॉर्ड पर लेते हुए हाईकोर्ट ने मुख्य अपील और अंतरिम जमानत, दोनों पर नोटिस जारी कर दिया।

गौरतलब है कि ट्रायल कोर्ट ने 4 जुलाई को उमर खालिद की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि गुलफिशा फातिमा और सैयद इफ्तिखार अंद्राबी मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला पहले ही बड़ी पीठ के पास भेजा जा चुका है। जब तक उस कानूनी प्रश्न पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक जमानत पर विचार करना उचित नहीं होगा।

इसी आदेश में सह-आरोपी शरजील इमाम की जमानत भी खारिज की गई। ट्रायल कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेश का पालन करने के अलावा उसके पास कोई विकल्प नहीं है।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि संरक्षित गवाहों की गवाही पूरी होने या उसके आदेश की तारीख से एक वर्ष पूरा होने, जो भी पहले हो, उसके बाद शरजील इमाम दोबारा जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि 5 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने गुलफिशा फातिमा, मीरां हैदर, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दी थी जबकि उमर खालिद और शरजील इमाम को राहत देने से इनकार कर दिया था।

बाद में सुप्रीम कोर्ट की एक अन्य पीठ ने गुलफिशा फातिमा मामले के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उसमें भारत संघ बनाम के.ए. नजीब मामले में तीन जजों की पीठ द्वारा दिए गए फैसले का समुचित पालन नहीं किया गया। इसके बाद मई में सुप्रीम कोर्ट ने इस कानूनी प्रश्न को बड़ी पीठ के विचार के लिए भेज दिया।

यह मामला वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़ी FIR नंबर 59/2020 से संबंधित है, जिसकी जांच दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा कर रही है। इस मामले में IPC और UAPA की विभिन्न धाराओं के तहत कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

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