हाईकोर्ट का दिल्ली सरकार को निर्देश: सरकारी वकीलों के लंबित बिल जल्द निपटाएं, ऑनलाइन पोर्टल की खामियां दूर करें
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को उसके लिए पैरवी करने वाले वकीलों के लंबित बिलों का जल्द निपटारा करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि ऑनलाइन सिंगल विंडो सिस्टम (OSWS) पोर्टल पर प्रत्येक वकील के नाम के सामने लंबित बिलों की स्थिति स्पष्ट रूप से अपडेट की जाए। साथ ही जिन मामलों में संबंधित वकील की पेशी आदेश-पत्र में दर्ज है, वहां ब्रीफ ट्रांसमिशन फॉर्म (BTF) जारी करने के लिए प्रशासनिक कदम उठाए जाएं।
जस्टिस मिनी पुष्कर्णा ने यह निर्देश दिल्ली सरकार के पैनल काउंसल अंजना गोसाईं समेत दो याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिकाकर्ताओं ने खुद कोर्ट में पेश होकर दिल्ली सरकार के ऑनलाइन सिंगल विंडो सिस्टम पर बिल अपलोड करने में आ रही दिक्कतों की जानकारी दी।
वकीलों की ओर से बताया गया कि बिलों में बार-बार अलग-अलग आपत्तियां लगाई जा रही हैं, लेकिन उनका निपटारा नहीं हो रहा है। एडवोकेट ऋषिकेश कुमार ने बताया कि उन्होंने करीब 500 बिल जमा किए, जिनमें लगभग 250 पर आपत्तियां लगाई गईं। उनका कहना था कि एक आपत्ति का जवाब देने के बाद दूसरी आपत्ति लगा दी जाती है, जिससे बिल लगातार लंबित रहते हैं।
एडवोकेट उदित मलिक ने बताया कि कई मामलों में BTF जारी ही नहीं किए गए। ऐसे मामलों में, हालांकि उन्होंने दिल्ली सरकार की ओर से अदालत में पेश होकर मुकदमे का बचाव किया, लेकिन BTF के अभाव में ऑनलाइन पोर्टल बिल अपलोड करने की अनुमति नहीं देता।
एक अन्य वकील दिव्यम नंदराजोग ने कहा कि कुछ बिलों का भुगतान किया जा रहा है, लेकिन अधिकांश अब भी लंबित हैं। उन्होंने यह भी बताया कि GNCTD पोर्टल पर बिलों की स्थिति अपडेट नहीं की जा रही है, जिससे वकीलों को यह पता लगाने में परेशानी होती है कि कौन-से बिल स्वीकृत हो चुके हैं और कौन-से लंबित हैं।
दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील तुषार सन्नू ने कोर्ट को दो स्टेटस रिपोर्ट सौंपीं। उन्होंने बताया कि समस्या के समाधान के लिए राजस्व सचिव-सह-मंडलायुक्त की अध्यक्षता में उच्च स्तर पर नियमित बैठकें की जा रही हैं। उत्तर-पूर्वी जिले के डिप्टी कमिश्नर/मुख्यालय-I ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होकर कहा कि वकीलों द्वारा जमा किए गए बिलों में कमियों को दूर करने के लिए नियमित कदम उठाए जा रहे हैं।
सभी पक्षकारों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऑनलाइन पोर्टल को इस तरह अपडेट किया जाए कि प्रत्येक वकील के नाम के सामने उसके लंबित बिल स्पष्ट रूप से दिखाई दें। कोर्ट ने यह भी कहा कि जहां BTF जारी नहीं हुए हैं, वहां संबंधित वकील की पेशी आदेश-पत्र में दिल्ली सरकार की ओर से दर्ज होने पर BTF जारी करने के लिए प्रशासनिक कदम उठाए जाएं।
हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को ऐसे मामलों में भी ऑनलाइन पोर्टल पर बिल अपलोड करने की व्यवस्था तैयार करने को कहा, जहां BTF अभी जारी नहीं हुए हैं। कोर्ट ने कानून एवं न्याय विभाग से एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने पर विचार करने का निर्देश भी दिया, जो वकीलों के साथ बिलों से जुड़ी आपत्तियों, बिल जमा करने और कमियों को दूर करने के संबंध में समन्वय कर सके।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन बिलों में BTF नंबर पहले से दर्ज हैं, उनके लिए दिल्ली सरकार भौतिक रूप से BTF की प्रतियां नहीं मांगेगी। साथ ही, संबंधित डिप्टी कमिश्नर को राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ समन्वय कर उन मामलों में BTF जारी कराने की जिम्मेदारी दी गई, जहां आदेश-पत्र में वकील की पेशी दर्ज होने के बावजूद BTF जारी नहीं हुआ।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि वकीलों के बिलों का जल्द से जल्द निपटारा करने का प्रयास किया जाए। हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई 4 नवंबर को निर्धारित करते हुए दिल्ली सरकार से तब तक नई स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा। संबंधित राजस्व विभाग के अधिकारी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उपस्थित रहने का भी निर्देश दिया गया।
दिल्ली हाईकोर्ट वर्ष 2021 से ऑनलाइन पोर्टल की कार्यप्रणाली की निगरानी कर रहा है। नवंबर 2023 में कोर्ट ने दिल्ली सरकार को OSWS पोर्टल को प्रभावी रूप से चालू करने के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया। इसके बाद 2024 में कोर्ट ने कहा था कि सरकारी पैनल के वकीलों के फीस बिल पोर्टल पर बिना तकनीकी अड़चनों के आसानी से अपलोड हो सकें।
एक समन्वय पीठ ने भी दिल्ली सरकार के सभी विभागों को OSWS व्यवस्था को प्रभावी ढंग से संचालित करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में संवेदनशील बनाया जाना चाहिए कि पोर्टल पर बिल जमा होने के बाद उनका निपटारा दिल्ली सरकार की निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार ही किया जाए।