COVID-19 पाबंदियों के दौरान 2021 में तिरंगा यात्रा निकालने का मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व AAP MLA के खिलाफ दर्ज FIR की रद्द
दिल्ली हाईकोर्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व MLA कुलदीप कुमार के खिलाफ दर्ज दो FIR रद्द की। ये FIR 2021 में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर तिरंगा यात्रा निकालने के कारण दर्ज की गईं, जबकि उस समय COVID-19 महामारी के कारण पाबंदियां लागू थीं।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने इसी घटना के सिलसिले में चार अन्य लोगों - रविंदर, योगेश, अनीता भट्ट और धीरेंद्र - के खिलाफ दर्ज FIR को भी रद्द किया।
कोर्ट ने कहा कि ये FIR एक ही घटनाक्रम (Continuous Transaction) से जुड़ी हैं और कई मुकदमों की इजाज़त देना 'दोहरे खतरे' (Double Jeopardy) के खिलाफ संवैधानिक सुरक्षा का उल्लंघन होगा।
कोर्ट ने कहा,
"चूंकि विवादित FIR एक ही घटनाक्रम से जुड़ी हैं और 'समानता की कसौटी' (Test of Sameness) पर खरी उतरती हैं, इसलिए इनके संबंध में एक के बाद एक FIR दर्ज करना कानूनी रूप से सही नहीं ठहराया जा सकता।"
इसके अनुसार, कोर्ट ने कल्याणपुरी पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR नंबर 413/2021 और गाजीपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR नंबर 372/2021 को उनसे जुड़ी सभी आगे की कार्यवाही के साथ रद्द किया।
दिल्ली पुलिस का आरोप था कि कोंडली विधानसभा क्षेत्र के तत्कालीन MLA कुलदीप कुमार ने COVID-19 पाबंदियों - जिनमें निषेधाज्ञा (Prohibitory Orders), सोशल डिस्टेंसिंग के नियम और मास्क पहनने की अनिवार्यता शामिल थी - का उल्लंघन करते हुए तिरंगा यात्रा का नेतृत्व किया था।
यह जुलूस जब न्यू अशोक नगर, कल्याणपुरी और गाजीपुर पुलिस स्टेशनों के अधिकार क्षेत्र से गुजरा, तो वहां अलग-अलग FIR (IPC की धारा 188 के तहत) दर्ज की गईं।
कुमार और अन्य लोगों ने तर्क दिया कि सभी FIR एक ही घटना से जुड़ी थीं और कुमार तथा सह-याचिकाकर्ता रविंदर को न्यू अशोक नगर वाली FIR में पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है।
उन्होंने दलील दी कि बाकी मुकदमों को जारी रखना एक ही घटनाक्रम के लिए बार-बार FIR दर्ज करने जैसा होगा और यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 20(2) तथा CrPC की धारा 300 का उल्लंघन होगा।
FIR रद्द करते हुए कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की इस दलील को खारिज कर दिया कि हर बार जब तिरंगा यात्रा किसी दूसरे पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में प्रवेश करती थी और निषेधाज्ञा का उल्लंघन करते हुए आगे बढ़ती थी तो वह आदेश न मानने का एक नया कृत्य (Fresh act of Disobedience) बन जाता था, जिससे IPC की धारा 188 के तहत एक अलग अपराध बनता है। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद जानकारी से यह पता नहीं चलता कि पहला कथित उल्लंघन होने के बाद तिरंगा यात्रा खत्म हो गई, या यह कि प्रतिभागी तितर-बितर हो गए। बाद में फिर से इकट्ठा हुए थे, जिससे यह एक अलग घटना बन जाती।
कोर्ट ने आगे कहा कि अभियोजन पक्ष का भी यही कहना था कि संबंधित रैली अलग-अलग इलाकों से गुजरती रही।
कोर्ट ने कहा,
"सिर्फ इसलिए कि वही जुलूस अलग-अलग पुलिस थानों के अधिकार क्षेत्र वाले इलाकों से गुजरा, या इसलिए कि जुलूस के आगे बढ़ने के साथ-साथ निषेधाज्ञा (Prohibitory Orders) का कथित उल्लंघन जारी रहा, इससे एक ही लगातार घटना कई अलग-अलग घटनाओं में नहीं बदल जाती।"
कोर्ट ने माना कि यह मामला 'एक ही घटना' (Sameness) की कसौटी पर खरा उतरता है क्योंकि इसमें मकसद और योजना एक ही थी, समय और जगह पास-पास थे, और कार्रवाई लगातार चल रही थी।
कोर्ट ने कहा कि FIR एक ही लगातार घटना, यानी तिरंगा यात्रा, से जुड़ी थीं और उनमें अलग-अलग समय पर निषेधाज्ञा और COVID-19 प्रोटोकॉल के कथित उल्लंघन का ज़िक्र था, जब वही जुलूस अलग-अलग इलाकों से गुज़र रहा था।
कोर्ट ने आगे कहा कि अलग-अलग पुलिस थानों के अलग-अलग पुलिस अधिकारियों द्वारा रिपोर्ट करने के समय और जगह में अंतर होने से उस अपराध की प्रकृति नहीं बदलती जो निषेधाज्ञा का उल्लंघन करके और COVID-19 प्रोटोकॉल तोड़कर यात्रा निकालने से हुआ था; यह एक ही घटना थी।
FIR रद्द करते हुए कोर्ट ने यह स्पष्ट किया:
"इस कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस फैसले का यह मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए कि IPC की धारा 188 के तहत कथित उल्लंघनों के लिए कभी भी अलग FIR दर्ज नहीं की जा सकतीं। जैसा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के फैसलों में देखा गया, अगर बाद की घटना अलग हो, कोई जवाबी पक्ष (Counter-Version) पेश किया जाए, या बाद की जांच में कोई बड़ी साजिश या अलग अपराध का पता चले, तो दूसरी FIR दर्ज की जा सकती है। हालाँकि, मौजूदा मामला इनमें से किसी भी श्रेणी में नहीं आता है।"
Title: KULDEEP KUMAR v. STATE & other connected matters