दिल्ली हाईकोर्ट ने एक्टर रवि किशन के पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा की, AI से बने अश्लील कंटेंट हटाने का आदेश

Update: 2026-07-07 14:42 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक्टर और BJP सांसद रवि किशन के पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा के लिए एक अंतरिम आदेश जारी किया।

जस्टिस ज्योति सिंह ने कई लोगों और ऑनलाइन संस्थाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीपफेक और दूसरी तकनीकों के ज़रिए उनके नाम, तस्वीर, शक्ल-सूरत और उनके व्यक्तित्व की दूसरी विशेषताओं का बिना इजाज़त इस्तेमाल करने से रोक दिया।

कोर्ट ने यह अंतरिम आदेश किशन द्वारा कई प्रतिवादियों (डिफेंडेंट्स) के खिलाफ दायर मुकदमे की सुनवाई के दौरान दिया। इन प्रतिवादियों में अज्ञात लोग (जॉन डो), डोमेन रजिस्ट्रार और मेटा प्लेटफॉर्म्स और गूगल LLC जैसे मध्यस्थ शामिल थे।

कोर्ट ने माना कि रवि किशन, जिनका तीन दशकों से ज़्यादा का सफल एक्टिंग करियर रहा है और जो सांसद भी रहे हैं, उनके पास अपने नाम, तस्वीर, आवाज़ और शक्ल-सूरत जैसी विशेषताओं पर लागू करने योग्य पर्सनैलिटी राइट्स हैं।

कोर्ट ने ज़ोर देकर कहा,

"पर्सनैलिटी राइट्स को अब कानूनी तौर पर मान्यता दी गई है और उनकी रक्षा करने की ज़रूरत को भी समझा गया।"

जस्टिस सिंह ने निष्कर्ष निकाला कि किशन किसी भी ऐसे कंटेंट के खिलाफ शिकायत करने के हकदार हैं, जो उनके पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन करता हो, या अश्लील हो, या जिसमें यौन रूप से स्पष्ट या पोर्नोग्राफिक कंटेंट हो और जो जनता, परिवार और दोस्तों के बीच उनकी छवि, गुडविल और प्रतिष्ठा को खराब करता हो। साथ ही, वे दोषियों के खिलाफ सुरक्षा और कार्रवाई की मांग भी कर सकते हैं।

मुकदमे के अनुसार, रवि किशन ने आरोप लगाया कि कई सोशल मीडिया अकाउंट्स ने उनकी तस्वीर और आवाज़ का इस्तेमाल करके अश्लील और AI-जनरेटेड वीडियो अपलोड किए। इन वीडियो में उन्हें गलत तरीके से एक राजनीतिक बिचौलिये के तौर पर दिखाया गया, उनके नाम से मनगढ़ंत राजनीतिक बयान जोड़े गए और उनके बोलने के अंदाज़ का मज़ाक उड़ाया गया।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई वेबसाइटें यौन रूप से स्पष्ट और पोर्नोग्राफिक कंटेंट के संबंध में उनके नाम का इस्तेमाल कर रही थीं, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को भारी नुकसान पहुंचा।

मुकदमे में

"व्हाट इज़ लव विद कवि किशन" (What is Love with Kavi Kishan) नाम के एक रेडियो प्रोग्राम में उनके नाम और शक्ल-सूरत के बिना इजाज़त इस्तेमाल को भी चुनौती दी गई।

रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री की जांच करने के बाद कोर्ट ने माना कि एक्टर और राजनेता ने एकतरफा अंतरिम रोक (ex parte ad interim injunction) पाने के लिए प्रथम दृष्टया (prima facie) मामला साबित किया। कोर्ट ने कहा कि सुविधा का संतुलन उनके पक्ष में है और अंतरिम सुरक्षा न मिलने पर उन्हें अपूरणीय क्षति होगी।

इसके अनुसार, कोर्ट ने जॉन डो (अज्ञात लोगों) सहित विभिन्न प्रतिवादियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के ज़रिए कमर्शियल या व्यक्तिगत लाभ के लिए रवि किशन के पर्सनैलिटी राइट्स—जिनमें उनका नाम, तस्वीर, शक्ल-सूरत और पहचान योग्य अन्य विशेषताएं शामिल हैं—का इस्तेमाल या शोषण करने से रोक दिया। साथ ही उन्हें उनकी पहचान का इस्तेमाल करके कोई भी अश्लील या पोर्नोग्राफ़िक कंटेंट पोस्ट करने से भी रोका गया।

कोर्ट ने संबंधित डोमेन नेम रजिस्ट्रार को यह भी निर्देश दिया कि वे आदेश के साथ लगे अनुलग्नक (annexure) में बताए गए उल्लंघन करने वाले URL को तीन दिनों के भीतर हटा दें।

आदेश का पालन न होने की स्थिति में किशन को मेटा, गूगल LLC और X कॉर्प को सूचित करने की अनुमति दी गई। इन कंपनियों को निर्देश दिया गया कि वे ऐसी सूचना मिलने के 72 घंटों के भीतर संबंधित URL को हटाने की प्रक्रिया शुरू करें।

Title: RAVINDRA SHUKLA ALIAS RAVI KISHAN v. ASHOK KUMAR (JOHN DOE) & ORS

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