सत्य निकेतन पीजी हादसा: हाईकोर्ट का DU के सभी कॉलेजों में हॉस्टल की मांग वाली जनहित याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार
सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी भवन गिरने की घटना के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के सभी कॉलेजों में हॉस्टल की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को तत्काल सुनवाई से इनकार किया। अदालत ने कहा कि इस तरह का निर्देश अंतरिम चरण में जारी नहीं किया जा सकता। याचिका को नियमानुसार सूचीबद्ध किया जाएगा।
चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की पीठ के समक्ष वकील ने मामले को मंगलवार को ही तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। वकील ने दलील दी कि रविवार को सत्य निकेतन में पीजी भवन ढहने की घटना के बाद छात्रों की सुरक्षा को देखते हुए मामले पर तत्काल सुनवाई जरूरी है। हादसे में कई लोगों की मौत और घायल होने की बात सामने आई है।
इस पर पीठ ने कहा कि इसी मुद्दे से जुड़े एक अन्य मामले में हाईकोर्ट सोमवार को सुनवाई कर आदेश जारी कर चुका है। वकील ने स्पष्ट किया कि उस याचिका में मुआवजे समेत अलग राहत की मांग की गई, जबकि उनकी याचिका का उद्देश्य दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रत्येक कॉलेज में छात्रों के लिए हॉस्टल की व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
इस पर अदालत ने सवाल किया कि क्या अंतरिम तौर पर ऐसा निर्देश जारी किया जा सकता है। पीठ ने कहा कि याचिका दाखिल की जाए उसे नियमानुसार सूचीबद्ध किया जाएगा।
सत्य निकेतन में रविवार दोपहर करीब डेढ़ बजे दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिण परिसर के पास लड़कों के पीजी के रूप में इस्तेमाल हो रही पांच मंजिला इमारत उस समय ढह गई, जब उसके तहखाने में मरम्मत का काम चल रहा था। स्थानीय लोगों ने दावा किया था कि तहखाने में पानी भरा हुआ था, जिससे इमारत की संरचना कमजोर हुई हो सकती है।
घटना के मामले में दिल्ली पुलिस ने भवन मालिक हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी उर्मिला और उनके बेटे महेश के खिलाफ दक्षिण परिसर थाने में मामला दर्ज किया। तीनों पर गैर इरादतन हत्या, इमारत के रखरखाव में लापरवाही और लोगों की सुरक्षा खतरे में डालने समेत कई धाराओं में कार्रवाई की गई।
मंगलवार रात हरिराम गुप्ता और उनकी पत्नी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया, जबकि उनके बेटे को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया। पुलिस के अनुसार, इमारत का बिजली कनेक्शन हरिराम के नाम पर था। आरोप है कि महेश संपत्ति और उसके प्रबंधन से जुड़े कामकाज को देखता था, जबकि दस्तावेजों में संपत्ति उसकी मां उर्मिला के नाम थी।
इससे पहले सोमवार को हाईकोर्ट ने प्रशासन को हादसे में प्रभावित छात्रों की जान बचाने के लिए राहत और बचाव प्रयास दोगुने करने का निर्देश दिया। अदालत ने दिल्ली नगर निगम को मामले को सर्वोच्च प्रशासनिक स्तर पर देखने और यह जांच कराने को कहा था कि ढही इमारतों का निर्माण वैध अनुमति के तहत हुआ था या नहीं।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि जांच में निर्माण के लिए वैध अनुमति नहीं पाई जाती है तो दिल्ली नगर निगम को लापरवाही बरतने वाले संबंधित अधिकारी या कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करनी होगी।