संसद की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की मांग वाली PIL खारिज, दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- यह सरकार और संसद का विषय
दिल्ली हाईकोर्ट ने संसद की सुरक्षा, संरक्षा और निर्बाध संवैधानिक कार्यप्रणाली की समीक्षा कराने संबंधी जनहित याचिका (PIL) खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि संसद की सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना केंद्र सरकार और संसद का विषय है तथा इस संबंध में अनुच्छेद 226 के तहत कोई निर्देश जारी नहीं किया जा सकता।
चीफ़ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने कहा कि अदालत यह निर्देश नहीं दे सकती कि संसद अपनी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करे। पीठ ने टिप्पणी की, "क्या इस देश की संसद अपनी सुरक्षा का ध्यान रखने में सक्षम नहीं है? हर सुझाव जनहित याचिका का विषय नहीं बन सकता।"
याचिकाकर्ता राज सिंह ने संसद की सुरक्षा, प्रशासनिक, तकनीकी और साइबर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कराने के साथ-साथ संसद की सुरक्षा पर अपने द्वारा तैयार किए गए एक कॉन्सेप्ट नोट पर विचार करने का भी निर्देश देने की मांग की थी।
हाईकोर्ट ने इन मांगों को अस्वीकार करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावित कानून या कॉन्सेप्ट नोट पर विचार करने का निर्देश न्यायालय अपने रिट अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुए नहीं दे सकता। इसी आधार पर अदालत ने याचिका खारिज कर दी।