ऑनलाइन पोर्टल पर ICU बेड खाली होने के बावजूद मरीज़ को नहीं मिला बेड: दिल्ली हाईकोर्ट ने 38 सरकारी अस्पतालों का ऑडिट करने का आदेश दिया

Update: 2026-07-07 13:18 GMT

हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार के उन 38 अस्पतालों का अचानक ऑडिट करने का आदेश दिया, जहां NextGen e-Hospital Management Information System (HMIS) लागू किया गया। यह आदेश तब दिया गया जब ऑनलाइन पोर्टल पर ICU बेड खाली होने के बावजूद एक मरीज़ को बेड देने से मना कर दिया गया। [2026 LiveLaw (Del) 631]

HMIS एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म है, जिसे हेल्थकेयर से जुड़े कामों को डिजिटल बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया। इसके साथ ही "दिल्ली ICU बेड सारथी" एप्लीकेशन भी है, जो दिल्ली के अस्पतालों में इमरजेंसी ICU बेड की रियल-टाइम जानकारी देता है।

जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की बेंच राष्ट्रीय राजधानी में हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर और पब्लिक हेल्थ सुविधाओं से जुड़े कई मामलों की सुनवाई कर रही थी।

कोर्ट ने दिल्ली सरकार को एक टोल-फ्री नंबर शुरू करने पर विचार करने का निर्देश दिया, जिसमें इमरजेंसी सेवाओं और ICU बेड की उपलब्धता से जुड़ी जानकारी के लिए कम-से-कम 10 से 20 लाइनें हमेशा उपलब्ध हों।

यह निर्देश तब आया जब एमिक्स क्यूरी ने कोर्ट को बताया कि सांस लेने में तकलीफ़ से जूझ रही एक 70 वर्षीय महिला को LNJP अस्पताल से लौटा दिया गया।

कोर्ट में मौजूद मरीज़ के परिवार ने बताया कि जब वे अस्पताल पहुंचे तो ऑनलाइन पोर्टल पर दो ICU बेड खाली दिख रहे थे, फिर भी उन्हें इलाज नहीं मिला।

उन्होंने यह भी बताया कि अस्पताल के हेल्पलाइन नंबरों पर बार-बार कॉल करने के बावजूद कोई ठोस जवाब नहीं मिला। एक नंबर पर सिक्योरिटी गार्ड ने फ़ोन उठाया, लेकिन वह यह नहीं बता पाया कि कोई ICU बेड खाली है या नहीं।

इस स्थिति को "दुर्भाग्यपूर्ण" बताते हुए बेंच ने कहा कि इस घटना ने ICU बेड मैनेजमेंट सिस्टम को लागू करने के तरीके पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

बेंच ने टिप्पणी की,

"यह एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है, जो दिखाती है कि वेबसाइट पर ICU बेड खाली होने के बावजूद मरीज़ को बेड नहीं मिला।"

कोर्ट ने यह भी पाया कि दिल्ली सरकार के अस्पतालों में HMIS प्लेटफ़ॉर्म को लागू करने में एकरूपता की कमी थी। इसके तहत कोर्ट ने जॉइंट डायरेक्टर आरती गर्ग की अगुवाई में नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) को निर्देश दिया कि वह 31 जुलाई 2026 तक सभी 38 अस्पतालों में अचानक निरीक्षण और ऑडिट करे।

ऑडिट रिपोर्ट में यह बताना होगा कि क्या पोर्टल पर ICU बेड की उपलब्धता की जानकारी सही-सही अपडेट की जा रही है, क्या ICU बेड से जुड़ी इमरजेंसी कॉल पर ठीक से ध्यान दिया जा रहा है और क्या HMIS प्लेटफॉर्म को सभी अस्पतालों में एक जैसा और लगातार लागू किया जा रहा है।

कोर्ट ने दिल्ली सरकार से एक टोल-फ्री हेल्पलाइन शुरू करने पर विचार करने को भी कहा, जिसमें 10 से 20 डेडिकेटेड लाइनें हों और जो ICU बेड की उपलब्धता और अस्पतालों की स्पेशलिटी के बारे में रियल-टाइम जानकारी दे सके।

इसके अलावा, कोर्ट ने इस बारे में भी जवाब मांगा कि क्या कोई नोडल ऑफिसर यह पक्का करने के लिए ज़िम्मेदार है कि एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में रेफर किए गए मरीज़ों को असल में भर्ती किया जाए। अगर ऐसा कोई सिस्टम नहीं है तो ऐसा सिस्टम बनाने के लिए प्रस्तावित कदमों की जानकारी कोर्ट के सामने रखी जाए।

मामले की गंभीरता को देखते हुए बेंच ने निर्देश दिया कि मरीज़ को ICU बेड और ज़रूरी इलाज के लिए तुरंत LNJP अस्पताल में डॉ. अमित गुप्ता के पास रेफर किया जाए, और सुनवाई की अगली तारीख तक स्टेटस रिपोर्ट मांगी।

इस मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त को होगी।

Case title: Court on its own motion v. UOI

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