मेडिकल रिपोर्ट में तिहाड़ जेल में मारपीट के दौरान फ्रैक्चर की पुष्टि: दिल्ली हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सज़ा काट रहे कैदी को 30 दिन की अंतरिम ज़मानत दी
दिल्ली हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सज़ा काट रहे कैदी को 30 दिन की अंतरिम ज़मानत दी। उसकी मेडिकल रिपोर्ट से पता चला कि उसकी बांह (Forearm) में फ्रैक्चर हुआ है, जिससे प्रथम दृष्टया (prima facie) इस आरोप की पुष्टि होती है कि तिहाड़ जेल के अंदर हेड वार्डन ने उसके साथ मारपीट की थी।
जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और विकास महाजन की डिवीज़न बेंच ने यह आदेश तब दिया, जब वह POCSO मामले में सज़ा के खिलाफ़ आशीष उर्फ़ विक्की की अपील पर सुनवाई कर रहे थे।
उसने ज़मानत, सज़ा पर अंतरिम रोक और तुरंत मेडिकल जांच की मांग की थी।
अपीलकर्ता तिहाड़ की सेंट्रल जेल नंबर 3 में बंद है। उसने आरोप लगाया कि 26 जून को सुबह 7 बजे से 11 बजे के बीच, एक हेड वार्डन ने उसके साथ मारपीट की, जिससे उसके हाथ में गंभीर चोटें आईं।
उसने यह भी दावा किया कि वार्डन ने पहले गैर-कानूनी "प्रोटेक्शन मनी" (सुरक्षा के नाम पर पैसे) की मांग की थी और यह मारपीट तब हुई जब उसने मांग पूरी करने में असमर्थता जताई।
कोर्ट ने अपने पिछले आदेश में इन आरोपों को "बेहद चिंताजनक" बताते हुए CCTV फुटेज सुरक्षित रखने, स्वतंत्र मेडिकल जांच कराने और संबंधित हेड वार्डन को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया था।
हाल की सुनवाई में कोर्ट को बताया गया कि जेल सुपरिटेंडेंट ने सीलबंद लिफ़ाफ़ा जमा किया, जिसमें जेल मेडिकल ऑफिसर की रिपोर्ट, पेन ड्राइव में CCTV फुटेज और मेडिकल रिपोर्ट शामिल हैं। हेड वार्डन ने भी अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की थी।
कोर्ट ने गौर किया कि अपीलकर्ता और दो अन्य कैदियों की जांच दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में की गई, जिसकी रिपोर्ट में कहा गया कि अपीलकर्ता की बाईं अल्ना (बांह की हड्डी) में फ्रैक्चर हुआ और कोहनी पर कास्ट (प्लास्टर) लगाया गया।
हालांकि, कोर्ट ने कहा कि वह CCTV फुटेज देखना चाहेगी, लेकिन अभी के लिए उसने टिप्पणी की कि अपीलकर्ता को लगी चोटें "कथित घटना की कुछ हद तक पुष्टि" करती हैं। इसलिए कोर्ट ने माना कि वह अंतरिम ज़मानत का हकदार है और विभिन्न शर्तों के साथ उसे 30 दिनों के लिए रिहा करने का आदेश दिया।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि घटना में कथित तौर पर घायल हुए अन्य दो कैदियों को दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल के डॉक्टरों की देखरेख में उचित इलाज मुहैया कराया जाए। इसके अलावा, कोर्ट ने निर्देश दिया कि CCTV फुटेज और अन्य दस्तावेज़ सीलबंद लिफ़ाफ़े में रखे जाएं। साथ ही कोर्ट ने जेल सुपरिटेंडेंट से कहा कि वे हेड वार्डन की रिपोर्ट में बताए गए 27 जून के उस कथित घटनाक्रम से जुड़े CCTV फुटेज को सुरक्षित रखें और एक हफ़्ते के भीतर पेश करें, जिसमें अपीलकर्ता शामिल था।
मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी।