दिल्ली हाईकोर्ट ने गुमशुदा लोगों के मामलों में 'ऑम्निबस' राहत की मांग वाली PIL खारिज की, कहा- पुलिसिंग पुलिस पर छोड़ देनी चाहिए
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को जनहित याचिका खारिज की, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी से लोगों के लापता होने के हालिया मुद्दे पर “ऑम्निबस” प्रार्थना की मांग की गई।
चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ता- आनंद लीगल एड फोरम ट्रस्ट को फटकार लगाते हुए कहा कि PIL में इस मुद्दे पर कोई खास उदाहरण या डिटेल्स नहीं हैं।
जब ट्रस्ट की ओर से पेश वकील ने कहा कि यह मुद्दा गंभीर हैं तो बेंच ने टिप्पणी की:
“इसलिए मामले को गंभीरता से लें। सिर्फ इसलिए कि आपको लगता है कि किसी मुद्दे को एक खास तरीके से निपटाया जाना चाहिए, यह मैंडेमस मांगने का आधार नहीं हो सकता। उन्हें यह करना चाहिए, उन्हें वह करना चाहिए। पुलिसिंग कैसे की जानी है, यह पुलिस पर छोड़ देना चाहिए।”
बेंच ने यह भी कहा कि याचिका में ऐसा कोई डेटा या उदाहरण नहीं बताया गया, जहां पीड़ित व्यक्ति ने पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया हो लेकिन FIR दर्ज नहीं की गई हो।
चीफ जस्टिस ने कहा,
“आम प्रार्थनाएं। आपको उदाहरण देने होंगे। याचिका फाइल करना और सामाजिक समस्याओं पर चर्चा करना अलग-अलग बातें हैं। याचिका फाइल करने के लिए आपको कोर्ट को खास उदाहरण देने होंगे। (यहाँ) कोई उदाहरण नहीं है।”
याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि साल 2020-2025 में लापता हुए लोगों की संख्या बताने के अलावा, PIL में ऐसा कोई खास उदाहरण नहीं बताया गया, जहां कोई व्यक्ति लापता हुआ हो और FIR दर्ज करने की कोशिश नाकाम रही हो।
कोर्ट ने कहा,
“रिट पिटीशन में ऐसी कोई खास जानकारी नहीं दी गई, जहां पुलिस ने FIR दर्ज करने से मना कर दिया हो, अगर लापता व्यक्ति के परिवार के सदस्य ने पुलिस स्टेशन से संपर्क किया हो। इसलिए प्रार्थनाएं a और b ओमनीबस हैं और उन्हें मंज़ूर नहीं किया जा सकता।”
सभी लापता मामलों में CBI को गहराई से जांच करने का निर्देश देने की मांग वाली प्रार्थना पर कोर्ट ने कहा कि लापता मामलों की रिपोर्ट की गई खास जानकारी के बिना ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं किया जा सकता।
दिल्ली में गुमशुदा लोगों के खतरनाक मामलों पर जॉइंट टास्क फोर्स की निगरानी और रिटायर्ड जज की अगुवाई में एक बॉडी बनाने की मांग वाली अर्जी पर कोर्ट ने कहा:
“पुलिसिंग एक ऐसा काम है, जिसे पुलिस अधिकारियों पर छोड़ देना चाहिए।”
बेंच ने यह भी कहा कि पुलिस अधिकारियों को यह निर्देश देना कोर्ट का काम नहीं है कि उनका संगठन कैसे काम करे।
इसमें यह भी कहा गया कि दिल्ली के हर पुलिस स्टेशन में गुमशुदा लोगों की रिपोर्ट करने के लिए खास सेल बनाना पुलिस का काम है, क्योंकि यह उनके काम करने के तरीके से जुड़ा है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस का स्ट्रक्चर कैसा होना चाहिए, यह सबसे अच्छे तरीके से संबंधित अधिकारी ही तय कर सकते हैं।
कोर्ट ने आदेश दिया,
“हम रिट याचिका पर विचार नहीं करना चाहते। इसे खारिज किया जाता है।”
Title: Anand Legal Aid Trust v. Union of India & Ors