उत्तम नगर होली विवाद: तोड़फोड़ के खिलाफ याचिका में पुलिस सुरक्षा की मांग नहीं जोड़ी जा सकती, हाइकोर्ट ने कहा- नई याचिका दायर करें
दिल्ली हाइकोर्ट ने उत्तम नगर होली विवाद मामले में आरोपियों के परिजनों को सलाह दी कि वे प्रस्तावित तोड़फोड़ कार्रवाई के खिलाफ बेहतर और अलग याचिका दायर करें। अदालत ने कहा कि संपत्ति को गिराए जाने से रोकने की मांग और पुलिस सुरक्षा की मांग को एक ही याचिका में नहीं जोड़ा जा सकता।
जस्टिस अमित बंसल की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि दोनों मांगें अलग-अलग कारणों से जुड़ी हैं और इन्हें एक साथ नहीं सुना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल वह केवल उस प्रार्थना पर विचार कर सकती है, जिसमें नगर निगम द्वारा बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए मकान गिराने से संरक्षण देने की मांग की गई।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि परिवार को धमकियां मिल रही हैं और इसलिए पुलिस सुरक्षा भी जरूरी है।
इस पर अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा,
“ये पूरी तरह अलग कारण हैं। यहां अदालत का अधिकार क्षेत्र अवैध निर्माण, अतिक्रमण और तोड़फोड़ से जुड़ा है। पुलिस सुरक्षा देना मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। आप दो अलग याचिकाएं दाखिल करें।”
अदालत ने यह भी कहा कि मौजूदा याचिका में किए गए आरोप अस्पष्ट हैं और अलग-अलग कारणों को एक साथ जोड़ा गया। इसके बाद याचिकाकर्ता के वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी ताकि एक सप्ताह के भीतर बेहतर विवरण के साथ नई याचिका दायर की जा सके। अदालत ने याचिका को इसी अनुमति के साथ वापस लेने की मंजूरी दी।
हालांकि याचिका वापस लेने के कारण अदालत ने कोई औपचारिक संरक्षण आदेश पारित नहीं किया लेकिन दिल्ली नगर निगम की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट ने अदालत को आश्वासन दिया कि जिन संपत्तियों का मामला अदालत में उठाया गया है उनके खिलाफ फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने दिल्ली पुलिस की ओर से दलील दी कि याचिका केवल संभावित तोड़फोड़ की आशंका पर आधारित है। इस तरह की याचिकाओं के जरिए आपराधिक जांच को प्रभावित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि हत्या या गंभीर अपराध हुआ है तो उसकी जांच होना आवश्यक है।
नगर निगम की ओर से सीनियर एडवोकेट संजय पोद्दार ने कहा कि याचिकाकर्ता अतिक्रमणकर्ता है और प्रस्तावित कार्रवाई नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि याचिका में यह नहीं बताया गया कि संबंधित संपत्ति सार्वजनिक सड़क या नाले पर अतिक्रमण नहीं है।
मामले की पृष्ठभूमि में बताया गया कि 5 मार्च को पड़ोसियों के बीच हुए झगड़े के बाद FIR दर्ज हुई। याचिका में दावा किया गया कि विवाद बच्चों के गुब्बारे खेलने को लेकर शुरू हुआ था लेकिन बाद में कुछ लोगों ने इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार 7 मार्च को इलाके में भीड़ जमा हो गई और आरोपियों के घर में घुसकर तोड़फोड़ तथा आगजनी की गई। इसके बाद 8 मार्च को एक आरोपी के घर को बुलडोजर से गिरा दिया गया वह भी बिना नोटिस या सुनवाई का मौका दिए।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि FIR दर्ज होने के तुरंत बाद यह कार्रवाई की गई जिससे यह आशंका पैदा होती है कि यह कदम दंडात्मक कार्रवाई के रूप में उठाया गया।
अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि नई याचिका उचित तथ्यों और विवरण के साथ दायर की जाती है तो उस पर विधि के अनुसार विचार किया जाएगा।