हमें सुने बिना दोषी ठहराया गया: आबकारी नीति मामले में ED की याचिका पर दिल्ली हाइकोर्ट का नोटिस
दिल्ली हाइकोर्ट ने आबकारी नीति कथित भ्रष्टाचार मामले में स्पेशल अदालत द्वारा की गई कुछ प्रतिकूल टिप्पणियों को हटाने की मांग वाली प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर नोटिस जारी किया। अदालत ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय की याचिका पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया और प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू ने कहा कि स्पेशल कोर्ट ने ये टिप्पणियां उस मामले में की थीं जो केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज किया गया, जबकि प्रवर्तन निदेशालय उस कार्यवाही का पक्षकार ही नहीं था।
उन्होंने अदालत से कहा,
“जिस मामले में ED का कोई संबंध ही नहीं था, उसमें हमें सुने बिना हमारे खिलाफ टिप्पणियां कर दी गईं। यह ऐसा है जैसे हमें बिना सुनवाई के दोषी ठहरा दिया गया हो।”
इस पर हाइकोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि पहली नजर में ये टिप्पणियां सामान्य प्रकृति की प्रतीत होती हैं और सीधे उस मामले से संबंधित नहीं दिखतीं। हालांकि अदालत ने कहा कि यह देखा जाएगा कि क्या ऐसी टिप्पणियां करना उचित था।
स्पेशल कोर्ट के आदेश पर विवाद
दरअसल, स्पेशल कोर्ट ने 27 फरवरी को आबकारी नीति मामले में सभी 23 आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया था। इनमें आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और के. कविता सहित कई अन्य आरोपी शामिल थे।
अपने आदेश में विशेष अदालत ने कहा कि केवल नकद खर्च, “अवैध फंडिंग” या “अघोषित खर्च” के आरोपों के आधार पर जांच एजेंसियों को चुनावी प्रक्रिया में दखल देने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
अदालत ने यह भी कहा कि धन शोधन निवारण कानून को तब तक लागू नहीं किया जा सकता जब तक किसी अनुसूचित अपराध से अपराध से अर्जित धन का स्पष्ट आधार मौजूद न हो।
ED की आपत्ति
ED ने हाइकोर्ट में दायर याचिका में कहा है कि विशेष अदालत ने उसके धन शोधन जांच से संबंधित टिप्पणियां बिना किसी साक्ष्य और बिना उसे सुनवाई का अवसर दिए कर दीं।
एजेंसी के अनुसार यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है और यदि ऐसी टिप्पणियां बनी रहीं तो उसकी चल रही जांच और कार्यवाही पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
हाइकोर्ट की आगे की कार्यवाही
दिल्ली हाइकोर्ट पहले ही CBI की उस याचिका पर भी नोटिस जारी कर चुका है, जिसमें स्पेशल कोर्ट द्वारा आरोपियों को आरोपमुक्त किए जाने के आदेश को चुनौती दी गई।
अदालत ने संकेत दिया कि दोनों मामलों पर एक साथ सुनवाई की जाएगी और पूरे फैसले को समग्र रूप से देखा जाएगा। फिलहाल हाइकोर्ट ने सभी पक्षों से जवाब मांगा और मामले की अगली सुनवाई बाद में होगी।