दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी में दिल्ली यूनिवर्सिटी के अंतर्गत आने वाले सभी कॉलेजों में छात्रों के लिए हॉस्टल सुविधा उपलब्ध कराने की मांग वाली PIL पर बुधवार को नोटिस जारी किया।

यह याचिका सत्या निकेतन इलाके में रविवार को पांच मंजिला PG/हॉस्टल इमारत गिरने की घटना के बाद दाखिल की गई है। हादसे में कई छात्रों की मौत और घायल होने की सूचना है।

हाईकोर्ट ने किनसे मांगा जवाब?

चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली यूनिवर्सिटी से जवाब मांगा।

हालांकि, कोर्ट ने याचिका में UGC को पक्षकार बनाए जाने पर सवाल उठाया और उसे पक्षकारों की सूची से हटाने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने कहा कि PIL एक गंभीर विषय है और याचिकाकर्ता विनोर झाकर के वकील को एक सप्ताह के भीतर संशोधित Memo of Parties दाखिल करने को कहा।

मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी। इसी दिन सत्या निकेतन हादसे से जुड़ी एक अन्य PIL भी सूचीबद्ध है।

याचिका में क्या मांग की गई?

याचिकाकर्ता ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों की जरूरत और मौजूदा हॉस्टल क्षमता का कॉलेज-वार व्यापक आकलन कराने की मांग की है।

इसके अलावा, पर्याप्त, सुरक्षित और किफायती हॉस्टल बनाने और मौजूदा हॉस्टल का विस्तार करने के लिए समयबद्ध Hostel Development Policy/Master Plan तैयार करने की मांग की गई है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि जिन कॉलेजों के पास जमीन उपलब्ध है, वहां हॉस्टल बनाए या बढ़ाए जाएं। वहीं, जिन कॉलेजों के पास जमीन की कमी है, उनके लिए सरकारी या यूनिवर्सिटी की जमीन पर Common/Cluster Hostels बनाए जाएं।

सत्या निकेतन हादसे में क्या हुआ?

दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास सत्या निकेतन इलाके में लड़कों के लिए बने एक PG भवन की मरम्मत के दौरान इमारत गिर गई।

बताया गया कि हादसा करीब दोपहर 1:30 बजे हुआ। स्थानीय लोगों ने दावा किया कि बेसमेंट में पानी भरा हुआ था, जिससे इमारत की संरचना कमजोर हुई हो सकती है।

दिल्ली पुलिस ने मामले में तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। मकान मालिक हरिराम गुप्ता और उनकी पत्नी को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है, जबकि उनके बेटे को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है।

पुलिस के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या, इमारत के रखरखाव में लापरवाही और लोगों की सुरक्षा को खतरे में डालने समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

हाईकोर्ट ने MCD को भी दिए निर्देश

इससे पहले हाईकोर्ट ने अधिकारियों से छात्रों की जान बचाने के लिए प्रयास दोगुने करने को कहा था।

कोर्ट ने MCD को इस मामले को उच्चतम कार्यकारी स्तर पर उठाने और यह जांच करने का निर्देश दिया कि गिरी हुई इमारतों का निर्माण वैध अनुमति के तहत हुआ था या नहीं।

अगर निर्माण बिना वैध अनुमति के पाया जाता है, तो हाईकोर्ट ने MCD को लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों या कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने का निर्देश दिया है।

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