निर्माण श्रमिकों के लिए जमा ₹3,000 करोड़ का सेस अब तक अप्रयुक्त, दिल्ली हाईकोर्ट ने मांगा एक्शन प्लान
निर्माण श्रमिकों के कल्याण के लिए एकत्र किए गए करीब ₹3,000 करोड़ के सेस के अब तक इस्तेमाल नहीं होने पर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार के श्रम विभाग और संबंधित कल्याण बोर्ड से जवाब मांगा है।
चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीजन बेंच ने अधिकारियों से पूछा कि क्या इस राशि का इस्तेमाल कर निर्माण एवं अन्य श्रमिकों को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए कोई एक्शन प्लान तैयार किया गया है।
कोर्ट के समक्ष दलील दी गई कि सेस के रूप में बड़ी राशि जमा होने के बावजूद उसके अप्रयुक्त रहने के कारण निर्माण एवं अन्य श्रमिक अपने वैधानिक लाभों से वंचित हो रहे हैं।
नए श्रम कानूनों के अनुरूप लाभ देने का निर्देश
कोर्ट निर्माण श्रमिकों के लिए Building and Other Construction Workers (Regulation of Employment and Conditions of Service) Act, 1996 के कार्यान्वयन से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था।
खंडपीठ ने कहा कि निर्माण श्रमिकों को नियंत्रित करने वाले वैधानिक ढांचे में Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020 और Code on Social Security, 2020 के लागू होने के बाद बदलाव आया है।
अदालत ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार के श्रम विभाग और संबंधित वेलफेयर बोर्ड को नए सिरे से हलफनामा दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया कि निर्माण एवं अन्य श्रमिकों को उपलब्ध लाभ पहुंचाने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
साथ ही अधिकारियों को यह बताने को कहा गया है कि सेस से जमा राशि का इस्तेमाल कर श्रमिकों को लाभ देने के लिए कोई एक्शन प्लान मौजूद है या नहीं।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि ऐसा कोई एक्शन प्लान मौजूद नहीं है, तो उसे नए श्रम कानूनों की वैधानिक आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार और लागू किया जाए।
निर्माण श्रमिकों के पंजीकरण पर भी निर्देश
हाईकोर्ट ने निर्माण एवं अन्य श्रमिकों के नियोक्ताओं के पंजीकरण के दौरान नए श्रम कानूनों और नियमों की सभी आवश्यकताओं का पालन सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया।
इसमें नियोक्ताओं से उनके द्वारा नियोजित निर्माण श्रमिकों की सूची प्राप्त करना भी शामिल है।
अदालत ने अधिकारियों को चार सप्ताह के भीतर हलफनामे दाखिल करने का निर्देश दिया है। इन हलफनामों की प्रति याचिकाकर्ताओं के वकीलों को पहले उपलब्ध करानी होगी, जिसके बाद उन्हें जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय मिलेगा।
कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय में हलफनामा दाखिल नहीं किया गया या उसमें मामले के निपटारे के लिए आवश्यक जानकारी नहीं दी गई, तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा।
मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी।