दिल्ली हाईकोर्ट ने 2021 के आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में आरोपी 64 वर्षीय महिला को अपने बेटे की सगाई और कोर्ट मैरिज में शामिल होने के लिए अमेरिका जाने हेतु अस्थायी रूप से पासपोर्ट वापस लेने की अनुमति दी है।

जस्टिस पुरुषैंद्र कुमार कौरव ने हालांकि जमानत की शर्त के तहत पासपोर्ट जमा करने में दो साल से अधिक की देरी को देखते हुए महिला को दिल्ली के एक सरकारी स्कूल को ₹2 लाख मूल्य का फर्नीचर या अन्य आवश्यक सामान उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

पासपोर्ट जमा करने में हुई थी देरी

महिला ने ट्रायल कोर्ट के पासपोर्ट रिलीज करने से इनकार करने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। वह 25 सितंबर से 11 अक्टूबर तक अमेरिका जाकर अपने बेटे की सगाई और कोर्ट मैरिज में शामिल होना चाहती थी।

कोर्ट ने माना कि उसने 2024 में अग्रिम जमानत देते समय पासपोर्ट तुरंत जमा करने के निर्देश का पालन नहीं किया था। हालांकि, यह चूक प्रथम दृष्टया अनजाने में हुई और इस दौरान उसने विदेश यात्रा भी नहीं की।

पासपोर्ट जमा करने की शर्त वैध

महिला ने तर्क दिया कि पासपोर्ट जमा करने की शर्त अधिकार क्षेत्र से बाहर थी। हाईकोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि पासपोर्ट जब्त करने की शक्ति पासपोर्ट प्राधिकरण के पास है, लेकिन जमानत की शर्त के रूप में पासपोर्ट अदालत में जमा कराने का निर्देश अलग है और वैध रूप से लगाया जा सकता है।

₹2 लाख की सामुदायिक सेवा

कोर्ट ने महिला की उम्र, कोई अन्य आपराधिक पूर्ववृत्त न होने, दिल्ली में स्थायी निवास और इस दौरान विदेश यात्रा न करने जैसे पहलुओं को देखते हुए सीमित राहत दी।

अदालत ने कहा कि न्याय के हित में उचित मामलों में जमानत की शर्तों के उल्लंघन के बदले सामुदायिक सेवा का निर्देश दिया जा सकता है।

महिला को किसी सरकारी स्कूल से संपर्क कर उसकी ₹2 लाख तक की फर्नीचर या अन्य आवश्यक सामान की जरूरत पूरी करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया है।

हालांकि, पासपोर्ट की रिहाई के लिए सामान की आपूर्ति पूरी होना जरूरी नहीं है। अमेरिका से लौटने के सात दिनों के भीतर पासपोर्ट फिर से जमा करना होगा।

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