दिल्ली हाईकोर्ट अब इस अहम कानूनी सवाल पर सुनवाई करेगा कि क्या पेंशन, ग्रेच्युटी, भविष्य निधि, अवकाश नकदीकरण और वैधानिक रिटायरमेंट लाभ से बनाई गई सावधि जमा को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत 'अपराध की आय' माना जा सकता है, जबकि इनका किसी अनुसूचित अपराध से जुड़ी आपराधिक गतिविधि के साथ सीधा संबंध न हो।

जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने संतोष कुमार गुप्ता और अन्य व्यक्ति की याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) को नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ताओं ने धन शोधन निवारण अधिनियम अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा चार अपीलों में पारित आदेश को चुनौती दी।

याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से यह घोषित करने की मांग की कि पेंशन, ग्रेच्युटी, कर्मचारी भविष्य निधि (EPF), अवकाश नकदीकरण और वैधानिक रिटायरमेंट लाभ से बनाई गई सावधि जमा को PMLA की धारा 2(1)(यू) के तहत 'अपराध की आय' नहीं माना जा सकता।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि न्यायिक आदेशों के बावजूद उनकी पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों को लगातार रोके रखना संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 300ए का उल्लंघन है।

उन्होंने ED को विशेष जज, सीबीआई कोर्ट, जयपुर द्वारा 21 मई 2018 को पारित आदेश तथा अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा 27 मई 2024 और 28 मई 2025 को पारित आदेशों का पालन करने का निर्देश देने की भी मांग की। इसके तहत पेंशन, ग्रेच्युटी, भविष्य निधि, अवकाश नकदीकरण और PMLA लाभ से जुड़े खातों तथा सावधि जमाओं को जारी करने या उन पर लगी रोक हटाने और उन पर अर्जित ब्याज देने की मांग की गई।

याचिकाकर्ताओं ने 35.5 करोड़ रुपये तक की वैकल्पिक संपत्तियां कुर्क करने का निर्देश देने की भी मांग की। उनके अनुसार यह वह राशि है, जिसे 2014 से सह-आरोपी के पास निवेश किया गया और जो उसके पास बनी हुई है। याचिकाकर्ताओं ने अपीलीय न्यायाधिकरण के आदेशों के अनुसार ऐसी वैकल्पिक संपत्तियों को कुर्क कर उन्हें मौजूदा कुर्की से मुक्त करने की मांग की।

हाईकोर्ट ने ED को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि जवाबी हलफनामे की अग्रिम प्रति याचिकाकर्ताओं के वकील को दी जाए और वे चाहें तो अगली सुनवाई से कम से कम दो दिन पहले उसका जवाब दाखिल कर सकते हैं।

मामले की अगली सुनवाई 3 दिसंबर को होगी।

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