ओला ड्राइवर ने जूनियर सिविल जज परीक्षा देने जा रही अभ्यर्थी को बीच रास्ते छोड़ा, ओला पर ₹50,000 मुआवजा
आंध्र प्रदेश में जूनियर सिविल जज मुख्य परीक्षा देने जा रही एक अभ्यर्थी और उसकी मां को कथित रूप से बीच रास्ते छोड़ने के मामले में कुर्नूल जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने ओला को सेवा में कमी (Deficiency in Service) का दोषी ठहराया है। आयोग ने कहा कि केवल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म होने का दावा करके कंपनी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।
मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता उल्लाजी चेन्नम्मा ने 11 अक्टूबर 2025 को गुंटूर से आचार्य नागार्जुन विश्वविद्यालय स्थित परीक्षा केंद्र जाने के लिए ओला के जरिए ऑटो बुक किया था। आरोप है कि चालक ऐप में दिखाए गए नंबर से अलग वाहन लेकर आया और OTP लेने के बाद यात्रा शुरू की।
हालांकि, परीक्षा केंद्र जाने के बजाय उसने रास्ता बदल दिया और उन्हें निर्धारित स्थान से करीब 25 किलोमीटर दूर ले गया।
शिकायत के अनुसार, बाद में चालक ने अतिरिक्त पैसे की मांग की। इंकार करने पर उसने अभद्र व्यवहार किया और सुबह करीब 7:28 बजे शिकायतकर्ता तथा उसकी मां को सड़क किनारे छोड़कर चला गया। इसके बाद उन्हें अपनी जेब से दूसरा ऑटो करके परीक्षा केंद्र पहुंचना पड़ा।
अभ्यर्थी ने आयोग को बताया कि घटना से उसे भारी मानसिक तनाव और भावनात्मक आघात पहुंचा, जिससे उसकी परीक्षा भी प्रभावित हुई।
कई शिकायतों और कानूनी नोटिस के बावजूद समाधान नहीं मिलने पर उसने उपभोक्ता आयोग का रुख किया।
ओला ने दलील दी कि वह केवल ड्राइवरों और ग्राहकों को जोड़ने वाला एक मध्यस्थ प्लेटफॉर्म है और ड्राइवर के आचरण के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
हालांकि आयोग ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि उपभोक्ता प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता के आधार पर सेवा लेते हैं, इसलिए कंपनी की जिम्मेदारी है कि वह अपने नेटवर्क से जुड़े ड्राइवरों की जवाबदेही और सुरक्षा सुनिश्चित करे।
आयोग ने माना कि चालक द्वारा रास्ता बदलना, अतिरिक्त पैसे मांगना और परीक्षा से पहले महिला अभ्यर्थी एवं उसकी मां को बीच रास्ते छोड़ देना गंभीर कदाचार और सेवा में कमी है।
आयोग ने ओला को शिकायतकर्ता को ₹50,000 मुआवजा और ₹5,000 वाद व्यय देने का निर्देश दिया। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी और सत्यापन व्यवस्था मजबूत करने को भी कहा।