उपभोक्ता आयोग का मारुति सुजुकी और डीलर को आदेश: ई-20 ईंधन के अनुकूल नई कार दें

Update: 2026-07-16 14:15 GMT

छत्तीसगढ़ के रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड और उसके अधिकृत डीलर को एक उपभोक्ता की कार वापस लेकर उसी मॉडल की ई-20 ईंधन के अनुकूल नई कार देने का निर्देश दिया। आयोग ने माना कि वाहन ई-20 पेट्रोल के अनुकूल नहीं होने की जानकारी खरीदार को नहीं दी गई और स्थायी समाधान भी उपलब्ध नहीं कराया गया, जो सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार है।

आयोग ने 14 जुलाई को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 35 के तहत डॉ. प्रेमराज देवता की शिकायत पर यह आदेश पारित किया।

शिकायत के अनुसार डॉ. देवता ने 3 जून 2024 को मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड डेल्टा प्लस 1.5 खरीदी थी। हालांकि यह वाहन जनवरी 2023 में निर्मित हुआ। शिकायत में कहा गया कि खरीद के पांच महीने के भीतर ही वाहन में बार-बार तकनीकी खराबी आने लगी और वह रास्ते में बंद हो जाता था।

वाहन को अधिकृत सर्विस सेंटर ले जाने पर पेट्रोल में अशुद्धि बताकर ईंधन टैंक की सफाई की गई, लेकिन कुछ समय बाद वही समस्या दोबारा सामने आ गई। दूसरी बार भी टैंक साफ किया गया और सर्विस सेंटर ने कहा कि पहली बार सफाई पूरी तरह नहीं हो सकी थी।

शिकायतकर्ता ने बताया कि दही जैसी बनावट वाले पेट्रोल के नमूने की सरकारी मान्यता प्राप्त लैब में जांच कराई गई, जिसमें एथेनॉल की मौजूदगी पाई गई। इसके बावजूद वाहन में खराबी दूर नहीं हुई और वह बार-बार बंद होता रहा।

मारुति सुजुकी और डीलर ने आयोग के समक्ष कहा कि वाहन में कोई निर्माण संबंधी दोष नहीं है। उनके अनुसार, खराब गुणवत्ता वाले ईंधन के कारण समस्या उत्पन्न हुई, जो वारंटी के दायरे में नहीं आती।

सभी पक्षों को सुनने और रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद आयोग ने कहा कि केवल वाहन की मरम्मत कर देना पर्याप्त समाधान नहीं है। आयोग ने पाया कि जनवरी 2023 में निर्मित यह वाहन ई-20 पेट्रोल के अनुकूल नहीं था, फिर भी जून 2024 में इसे उपभोक्ता को यह जानकारी दिए बिना बेच दिया गया।

आयोग ने कहा कि ईंधन बदलने, टैंक की कई बार सफाई कराने और नया पेट्रोल भरवाने के बावजूद वाहन में बार-बार खराबी आती रही। इसके बावजूद वाहन वापस लेकर ई-20 अनुकूल इंजन वाला नया वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया। यह सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार है।

इसी आधार पर आयोग ने मारुति सुजुकी और उसके अधिकृत डीलर को 45 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता की कार वापस लेकर उसी मॉडल की ई-20 अनुकूल नई कार देने का निर्देश दिया।

आयोग ने यह भी कहा कि यदि निर्धारित अवधि में नई कार उपलब्ध नहीं कराई जाती है तो शिकायतकर्ता को 20,50,494 रुपये का भुगतान किया जाए। इस राशि में वाहन की कीमत 18,29,000 रुपये, पंजीकरण शुल्क 1,86,850 रुपये और बीमा प्रीमियम 34,644 रुपये शामिल हैं।

इसके अलावा आयोग ने मानसिक पीड़ा के लिए एक लाख रुपये तथा वाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपये देने का भी आदेश दिया। यदि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया जाता है तो आदेश की तारीख से भुगतान होने तक सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

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