दाऊदी बोहरा उत्तराधिकार मामला: फ़ैसले के बाद रिटायर्ड जज जीएस पटेल और उनके परिवार को करना पड़ रहा धमकियों का सामना

Update: 2026-06-08 04:42 GMT

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, रिटायर्ड बॉम्बे हाईकोर्ट जज जस्टिस जीएस पटेल और उनके परिवार को भारत और यूनाइटेड किंगडम में लगभग दस महीनों से धमकियों और हिंसा का सामना करना पड़ रहा है। यह सब दाऊदी बोहरा उत्तराधिकार के लंबे समय से चल रहे विवाद पर 2024 में दिए गए उनके फ़ैसले से जुड़ा है।

रिपोर्ट में कहा गया कि हाल की घटना 5 जून को हुई, जब यूके में रहने वाली पटेल की बेटी अदिति पटेल को एक गुमनाम पत्र मिला। इस पत्र में उनके परिवार के "अंतिम संस्कार" (cremation) की धमकी दी गई, अगर जस्टिस पटेल YouTube वीडियो के ज़रिए 23 अप्रैल, 2024 के अपने फ़ैसले को सार्वजनिक रूप से वापस नहीं लेते हैं। बताया जाता है कि पत्र में एक SD कार्ड था और दावा किया गया था कि धमकियों को अंजाम देने के लिए एक "गैंग" को काम पर रखा गया।

रिपोर्ट के अनुसार, यह अभियान अगस्त 2025 में शुरू हुआ, जब मुंबई में पटेल की पत्नी और लंदन में उनकी बेटी को इसी तरह के पत्र भेजे गए। इन संदेशों में कथित तौर पर मांग की गई कि रिटायर्ड जज एक वीडियो रिकॉर्ड करके अपना फ़ैसला वापस लें और दावा करें कि उन्हें यह फ़ैसला देने के लिए मजबूर किया गया।

हिंदुस्तान टाइम्स ने आगे बताया कि इस साल 22 अप्रैल को लंदन में एक नकाबपोश व्यक्ति ने अदिति पटेल पर शारीरिक हमला किया, जिससे उनकी नाक टूट गई। यूके के अधिकारी हमले और धमकियों दोनों की जांच कर रहे हैं। बताया जाता है कि वेस्ट हर्टफोर्डशायर काउंटर-टेररिज्म यूनिट मामले की समीक्षा कर रही है, जबकि हर्टफोर्डशायर कॉन्स्टेबुलरी ने पुष्टि की कि मामले की जांच अभी भी चल रही है।

जस्टिस पटेल ने अखबार को बताया कि उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस, लंदन में भारतीय उच्चायुक्त और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत को धमकियों के बारे में सूचित किया। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि हाईकोर्ट के फ़ैसले को YouTube वीडियो के ज़रिए "वापस" नहीं लिया जा सकता और कहा कि फ़ैसले के खिलाफ सही कानूनी उपाय अपील करना है।

ये धमकियां दाऊदी बोहरा उत्तराधिकार विवाद में जस्टिस पटेल के अप्रैल 2024 के फ़ैसले से जुड़ी हैं। उस फ़ैसले में उन्होंने ताहिर फखरुद्दीन के नेतृत्व वाले गुट द्वारा दायर मुकदमे को खारिज कर दिया था और मुफद्दल सैफुद्दीन को दाऊदी बोहरा समुदाय के आध्यात्मिक प्रमुख, यानी 53वें दाई-अल-मुतलक के रूप में सही ठहराया था। यह फ़ैसला अभी बॉम्बे हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के सामने चुनौती के अधीन है। रिपोर्ट में बताया गया कि ताहिर फखरुद्दीन के प्रतिनिधियों ने धमकियों और हिंसा की निंदा की। उनका कहना है कि ऐसी हरकतें उनके पक्ष को बदनाम करने और लंबित अपील को पटरी से उतारने के मकसद से की गई थीं।

न्यायिक स्वतंत्रता पर इस तरह की धमकियों के असर को लेकर चिंता जताते हुए जस्टिस पटेल ने कहा कि जजों से बिना किसी डर या पक्षपात के काम करने की उम्मीद की जाती है। लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि अगर अपनी ड्यूटी निभाने के कारण जजों और उनके परिवारों को ऐसी धमकियों का सामना करना पड़े तो कौन जज के तौर पर काम करना चाहेगा?

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