'अच्छा कदम': हाईकोर्ट ने 'लॉरेंस ऑफ पंजाब' पर राज्य सरकार की कार्रवाई की प्रशंसा की
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने शुक्रवार को पंजाब सरकार की तारीफ़ की, जिसने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का महिमामंडन करने वाले ऑनलाइन कंटेंट ब्लॉक की, जिसमें डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर दिए गए उसके इंटरव्यू भी शामिल हैं।
पंजाब के AG मनिंदरजीत सिंह बेदी ने जब कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने बिश्नोई के अपराधों के महिमामंडन से जुड़े 2,600 से ज़्यादा लिंक ब्लॉक कर दिए हैं तो चीफ़ जस्टिस शील नागू ने मौखिक रूप से कहा, "यह आपकी तरफ़ से एक अच्छा कदम है।"
यह घटनाक्रम लुधियाना के सांसद राजा वारिंग द्वारा वकील निखिल घई के ज़रिए दायर जनहित याचिका (PIL) के बाद सामने आया। इस याचिका में OTT प्लेटफ़ॉर्म ZEE5 पर वेब सीरीज़ "लॉरेंस ऑफ़ पंजाब" की प्रस्तावित रिलीज़ और स्ट्रीमिंग पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई।
पंजाब सरकार के अनुरोध के बाद ZEE5 को सलाह दी गई कि वह इस फ़िल्म को रिलीज़ न करे। इसी के मद्देनज़र याचिका का निपटारा किया गया।
सुनवाई के दौरान, पंजाब सरकार ने कहा कि वह ऐसी फ़िल्मों के ख़िलाफ़ है, जो अपराध का महिमामंडन करती हैं और युवाओं को बिगाड़ती हैं। इसी पृष्ठभूमि में राज्य सरकार ने 22 अप्रैल को केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय को भी इस सीरीज़ की रिलीज़ के ख़िलाफ़ पत्र लिखा था।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी हाईकोर्ट ने लॉरेंस के इंटरव्यू के युवाओं पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता जताई।
यह देखते हुए कि पंजाब एक सीमावर्ती राज्य है, कोर्ट ने तब कहा था कि सीमा पार से "राष्ट्र-विरोधी तत्व" इन प्रभावित युवाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा बन सकता है।
कोर्ट ने कहा था,
"राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों, रंगदारी और टारगेट किलिंग के बीच एक बहुत महीन रेखा होती है।"
मौजूदा जनहित याचिका में सार्वजनिक व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द से जुड़ी चिंताओं को उजागर किया गया।
घई ने तर्क दिया कि विवादित वेब सीरीज़ गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के जीवन और गतिविधियों पर आधारित है। इसमें एक छात्र नेता से लेकर एक आपराधिक गिरोह के सरगना बनने तक के उसके "उदय" को दिखाने की कोशिश की गई।
उन्होंने कहा कि एक असल ज़िंदगी के गैंगस्टर के उदय, उसकी ताक़त और उसके प्रभाव को जिस तरह से दिखाया गया, उससे आपराधिक गतिविधियों का महिमामंडन हो सकता है; ऐसे कंटेंट का कोमल मनों पर, विशेष रूप से युवाओं पर, बुरा असर पड़ सकता है। इससे पंजाब जैसे संवेदनशील राज्य में सार्वजनिक व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द बिगड़ सकता है। बिना उचित सुरक्षा उपायों के ऐसे कंटेंट की स्ट्रीमिंग करना, OTT प्लेटफ़ॉर्म के ज़िम्मेदार नियमन की कमी को दर्शाता है।
पंजाब सरकार ने केंद्र को लिखे अपने पत्र में यह बात कही,
"इंटरनेट-आधारित प्लेटफ़ॉर्म पर मौजूद कंटेंट की पहुंच प्रिंट मीडिया के मुकाबले कहीं ज़्यादा होती है। इसका ऑडियो-विज़ुअल स्वरूप इसे ज़्यादा असरदार और प्रभावशाली बनाता है। इस तरह के कंटेंट तक समाज का एक बड़ा तबका आसानी से पहुँच सकता है—जिसमें पढ़े-लिखे और अनपढ़, दोनों तरह के लोग शामिल हैं—जिससे युवाओं और अन्य आसानी से प्रभावित होने वाले लोगों के आपराधिक या गैंग से जुड़ी गतिविधियों की ओर आकर्षित होने और उनसे प्रभावित होने का जोखिम बढ़ जाता है।"
Case: AMARINDER SINGH RAJA WARRING V/S UNION OF INDIA AND OTHERS