'Misleading Ad' Case में सलमान खान को राहत, NCDRC ने फोरेंसिक जांच से जुड़ी कार्यवाही पर लगाई रोक

Update: 2026-06-11 15:23 GMT

बॉलीवुड एक्टर सलमान खान को थोड़ी राहत देते हुए नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन (NCDRC) ने बुधवार (10 जून) को उनके खिलाफ "गुमराह करने वाले" पान मसाला विज्ञापन से जुड़े एक मामले में उनके सिग्नेचर की असलियत की जांच से जुड़ी कार्यवाही पर रोक लगाई।

प्रेसिडेंट जस्टिस (रिटायर्ड) एपी साही और मेंबर भरतकुमार पांड्या की NCDRC की बेंच ने कोटा में डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन (DCDRC) के सामने चल रही कार्यवाही पर रोक लगाई।

प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए कोर्ट ने कहा,

"अगले आदेश तक डिस्ट्रिक्ट कमीशन के सामने आगे की कार्यवाही पर रोक रहेगी।"

यह कदम कमला कांत एंड कंपनी द्वारा राजस्थान स्टेट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन (RSCDRC) के आदेशों को चुनौती देने के बाद उठाया गया। RSCDRC ने कोटा DCDRC के दिसंबर 2025 के आदेश में दखल देने से इनकार किया।

गौरतलब है कि कोटा DCDRC ने खान को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया और उनकी ओर से जमा की गई पावर ऑफ अटॉर्नी पर किए गए उनके सिग्नेचर की असलियत की फोरेंसिक जांच का भी आदेश दिया।

बता दें, इंद्र मोहन सिंह 'हनी' ने शुरू में कोटा DCDRC के सामने शिकायत दर्ज कराई, जिसमें राजश्री पान मसाला नाम के प्रोडक्ट के गुमराह करने वाले विज्ञापनों का आरोप लगाया गया। वकील ने आरोप लगाया कि खान ने इस प्रोडक्ट का प्रचार करते हुए कहा था कि इसमें 'चांदी की परत वाली केसर-युक्त इलायची' है, जिसकी कीमत 5 रुपये है।

हालांकि, वकील ने तर्क दिया कि केसर की कीमत लगभग 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम है। इसलिए 5 रुपये की कीमत वाले पान मसाले में केसर देना असंभव है और यह जनता को गुमराह कर रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि खान ने असल में 'गुटखा' का प्रचार किया, जिससे उपभोक्ताओं की जान को खतरा है।

शुरुआती चरण में शिकायतकर्ता ने दावा किया कि खान की ओर से पावर ऑफ अटॉर्नी पर किए गए सिग्नेचर उन सिग्नेचर से मेल नहीं खाते, जो उन्होंने पहले अन्य अदालती दस्तावेजों पर किए। उन्होंने दावा किया कि पावर ऑफ अटॉर्नी पर किया गया सिग्नेचर जोधपुर जेल और जोधपुर कोर्ट में दस्तावेजों पर किए गए उनके सिग्नेचर से अलग है।

इसलिए कोटा DCDRC ने खान के सिग्नेचर की फोरेंसिक जांच का आदेश दिया। इसी आदेश को RSCDRC के सामने चुनौती दी गई, लेकिन चुनौती को खारिज कर दिया गया, जिसके बाद मैन्युफैक्चरिंग कंपनी ने NCDRC का रुख किया।

NCDRC के सामने कंपनी की ओर से पेश हुई कानूनी टीम और खान ने बताया कि कोटा DCDRC इस मामले को किस तरह से देख रहा था। यह बताया गया कि कोटा DCDRC ने शिकायत के 'मेंटेनेबिलिटी' (यानी शिकायत सुनवाई के लायक है या नहीं) के मुद्दे की जांच करने के बजाय, पहले हस्ताक्षर के फोरेंसिक टेस्ट का आदेश दिया और बाद में कहा कि मेंटेनेबिलिटी पर फैसला हो चुका है।

10 जून के अपने आदेश में NCDRC ने अब तक मामले में हुई सभी घटनाओं पर गौर किया और शिकायत की मेंटेनेबिलिटी के मुद्दे पर विचार करने के लिए सुनवाई को 22 जून तक के लिए टाल दिया।

Case Title: Kamla Kant & Company LLP vs Indra Mohan Singh 'Honey'

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