NEET विवाद के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, जानें भारत में मंत्रियों के त्यागपत्र का इतिहास
NEET-UG परीक्षा में कथित धांधली और पेपर लीक को लेकर देशभर में जारी छात्र विरोध और जंतर-मंतर पर बढ़ते प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपना पत्र जारी करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनके लिए "व्यक्तिगत स्वाभिमान का विषय नहीं है", बल्कि देश के युवाओं के भविष्य और राष्ट्रीय एकता की रक्षा के लिए लिया गया निर्णय है।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि परीक्षा में अनियमितताएं सामने आते ही सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी, परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने का फैसला लिया और पारदर्शी व्यवस्था लागू की। हालांकि, हालात का गलत फायदा उठाए जाने की आशंका और छात्रों को भ्रम से बचाने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया।
भारत में मंत्रियों के इस्तीफे के चर्चित ऐतिहासिक मामले भारतीय राजनीति में मंत्रियों द्वारा नैतिकता, नीतिगत मतभेद या घोटालों के चलते इस्तीफा देने की एक लंबी परंपरा रही है:
1. नैतिक जिम्मेदारी (हादसे और आपदाएं)
लाल बहादुर शास्त्री (रेल मंत्री, 1956): तमिलनाडु के अरियालुर में हुए भीषण ट्रेन हादसे (140+ मौतें) की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया, जो भारतीय राजनीति में नैतिकता का एक मानक बना।
माधवराव सिंधिया (नागरिक उड्डयन मंत्री, 1993): दिल्ली में एक विमान दुर्घटना के बाद नैतिक आधार पर पद छोड़ दिया।नीतीश कुमार (रेल मंत्री, 1999): पश्चिम बंगाल के गैसाल में हुए भीषण ट्रेन हादसे के बाद पद से त्यागपत्र दे दिया।
शिवराज पाटिल (गृह मंत्री, 2008): 26/11 मुंबई आतंकी हमले के बाद सुरक्षा में चूक की जिम्मेदारी लेते हुए गृह मंत्री के पद से इस्तीफा दिया।
2. नीतिगत और वैचारिक मतभेद
डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (उद्योग मंत्री, 1950): स्वतंत्र भारत के कैबिनेट से इस्तीफा देने वाले पहले मंत्री। नेहरू-लियाकत समझौते से असहमति के कारण पद छोड़ा।
डॉ. बी.आर. अंबेडकर (कानून मंत्री, 1951): संसद में 'हिंदू कोड बिल' (महिलाओं को समान अधिकार देने वाला विधेयक) के पारित न हो पाने के विरोध में इस्तीफा दिया।
वी.पी. सिंह (रक्षा मंत्री, 1987): बोफोर्स रक्षा सौदे में भ्रष्टाचार की जांच और मतभेदों के चलते राजीव गांधी मंत्रिमंडल से पद छोड़ दिया।
3. अनियमितता और घोटालों के आरोप
पी. चिदंबरम (वाणिज्य मंत्री, 1992): 1992 के शेयर बाजार घोटाले से जुड़ी एक कंपनी में शेयर रखने की बात सामने आने पर इस्तीफा दिया।
ए. राजा (दूरसंचार मंत्री, 2010): 2G स्पेक्ट्रम आवंटन में वित्तीय अनियमितताओं और भारी राजनीतिक दबाव के चलते इस्तीफा देना पड़ा।