गुजरात के कलोल (गांधीनगर) की सेशंस कोर्ट ने सोमवार को गोहत्या मामले में 3 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई। इस मामले में 277 किलोग्राम गोमांस (बीफ) जब्त किया गया था। अदालत ने कहा कि अगर ऐसे आरोपियों को कानून के मुताबिक सजा नहीं दी गई, तो समय के साथ "गौ माता धरती से विलुप्त हो जाएंगी"।

अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 2 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। इसके अलावा, 'गुजरात पशु संरक्षण अधिनियम, 1954' के तहत अन्य अपराध के लिए उन्हें 10 साल की कठोर कारावास और 1 लाख रुपये प्रति व्यक्ति जुर्माने की सजा सुनाई गई। ये सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।

गुजराती भाषा में लिखे अपने 76 पन्नों के फैसले में एडिशनल सेशंस जज बृजेशकुमारी रामेश्वरसिंह राजपूत ने गायों के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर चर्चा की। उन्होंने मनुस्मृति और वेदों सहित कई हिंदू धर्मग्रंथों का हवाला दिया।

अदालत ने कहा कि मनुस्मृति में गाय (गोधन) को केवल एक जानवर नहीं, बल्कि समाज और धर्म का एक "स्तंभ" माना गया है।

अदालत ने पशुओं की रक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी का जिक्र किया, और हिंदू धार्मिक ग्रंथों में गायों को दिए गए महत्व पर भी चर्चा की।

अदालत ने ऋग्वेद का भी हवाला दिया, जिसमें गाय को "अधन्या" (जिसे मारा न जाना चाहिए) बताया गया।

फैसले में एक संस्कृत श्लोक भी शामिल किया गया:

"त्वं माता सर्वदेवानां त्वं च यज्ञस्य कारणम्।

त्वं तीर्थं सर्वतीर्थानां नमस्तेऽस्तु सदानघे॥"

"आप सभी देवताओं की माता हैं, और आप सभी पवित्र यज्ञों का स्रोत और कारण हैं। आप सभी पवित्र जल और तीर्थस्थलों में सबसे पवित्र हैं। हे सदा पवित्र, निर्दोष और मंगलकारी, मैं आपको हमेशा नमन करता हूँ।"

इस पृष्ठभूमि में, अदालत ने कहा कि वह गायों के महत्व को ध्यान में रखते हुए मामले के गुण-दोषों के आधार पर यह फैसला सुना रही है।

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