बालिग होने के नाते कपल लिव-इन रिलेशनशिप में साथ रहने का हकदार: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने 21 और 19 साल के जोड़े को सुरक्षा प्रदान की

Update: 2021-07-12 06:49 GMT

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक 21 वर्षीय लड़की और 19 वर्षीय लड़के को यह देखते हुए सुरक्षा प्रदान की कि दोनों बालिग होने के कारण लिव इन रिलेशनशिप में एक साथ रहने के हकदार हैं।

न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी की एकल न्यायाधीश पीठ ने कहा:

"मौजूदा मामले में याचिकाकर्ता बालिग होने के कारण लिव-इन-रिलेशनशिप में एक साथ रहने के हकदार हैं। इसलिए प्रतिवादी नंबर चार और पांच से किसी भी नुकसान के खिलाफ अपने जीवन और स्वतंत्रता की सुरक्षा के भी हकदार हैं।"

इस युगल ने ने लड़की के परिवार से सुरक्षा की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। लड़की का परिवार किसी अन्य के साथ उसकी शादी कराना चाहता है। दंपति को कथित तौर पर उनकी पारिवारिक प्रतिष्ठा के लिए परिवार द्वारा जान से मारने की धमकी भी दी गई है।

इस प्रकार याचिकाकर्ताओं का मामला था कि यद्यपि लड़के की उम्र 19 वर्ष है, लेकिन उसने शादी के लायक उम्र प्राप्त नहीं की है, विवाह योग्य आयु प्राप्त होते ही दोनों का विवाह हो जाएगा।

एक साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे दंपति ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर आवश्यक सुरक्षा की मांग की थी, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया था।

इस विषय पर संबंधित निर्णयों पर भरोसा करते हुए न्यायालय ने पुलिस को दंपति को सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने कहा,

"उपरोक्त चर्चा को ध्यान में रखते हुए याचिकाकर्ता नंबर दो वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, जिला मोहाली को याचिका में निर्धारित याचिकाकर्ताओं की शिकायतों पर गौर करने के निर्देश के साथ याचिका का निपटारा किया जाता है। साथ ही दिनांक 02.07.2021 को भी प्रतिनिधित्व में व्यक्त किया जाता है। उनके जीवन और स्वतंत्रता की सुरक्षा के लिए उपयुक्त कार्रवाई करें जैसा कि परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक हो।"

इसी तरह के मामले में हाईकोर्ट ने पिछले महीने लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाले 18 और 19 वर्ष की आयु के एक लड़के और एक लड़की को पुलिस सुरक्षा प्रदान की थी।

यह देखते हुए कि दोनों याचिकाकर्ता 18 वर्ष से अधिक आयु के है। हालांकि, लड़का विवाह के योग्य आयु का नहीं है, कोर्ट ने कहा:

"यह स्पष्ट है कि दोनों याचिकाकर्ता 18 वर्ष से अधिक आयु के हैं। हालांकि, लड़का विवाह योग्य उम्र का नहीं है। आजकल लिव-इन-रिलेशनशिप कोई नई घटना नहीं है, लेकिन समाज इस तरह के इस तरह के रिश्ते पर भौंहें चढ़ाए बिना संबंध को स्वीकार करने की सीमा तक विकसित नहीं हुआ है।"

कोर्ट ने आगे कहा,

"इस प्रकार, बार-बार माननीय सुप्रीम कोर्ट के साथ-साथ विभिन्न अन्य हाईकोर्ट ने लिव-इन-रिलेशनशिप को स्वीकार कर लिया है। इसके लिए वे भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत युगल के बचाव में आए हैं। याचिकाकर्ता द्वारा उठाया गया मुद्दा उनके लिव इन-रिलेशनशिप और उनके जीवन और स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के रूप में भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 में निहित हैं, लेकिन न्यायालय का संबंध केवल संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उनके अधिकार से है।"

शीर्षक: पुष्पा देवी और अन्य बनाम पंजाब राज्य और अन्य 

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