Durga Puja Stampede | पश्चिम बंगाल सरकार ने रिटायर जज की अध्यक्षता में गठित की SIT
पश्चिम बंगाल सरकार ने 17 अक्टूबर 2026 को कोलकाता में चोरबागन सार्वजनीन दुर्गा पूजा पंडाल के पास हुई भगदड़ की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। इस दल की अध्यक्षता रिटायर जज अनिंदिता रॉय सरस्वती करेंगी। सरकार ने बताया है कि इस दल का गठन कलकत्ता उच्च न्यायालय के परामर्श से किया गया।
मुख्य सचिव कार्यालय द्वारा 21 अक्टूबर को जारी एक आदेश के अनुसार, SIT इस घटना की व्यापक, निष्पक्ष और गहन जांच करेगी। यह दल घटना के कारणों और इसमें योगदान देने वाले कारकों का पता लगाएगा, जहां आवश्यक हो वहां जिम्मेदारी तय करेगा, और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उपाय सुझाएगा।
SIT में अध्यक्ष के रूप में रिटायर जज रॉय सरस्वती के अलावा, आपदा प्रबंधन और नागरिक सुरक्षा विभाग के प्रधान सचिव; पश्चिम बंगाल पुलिस की विशेष कार्य बल (STF) के महानिदेशक और पुलिस महानिरीक्षक; पुलिस महानिदेशक के प्रतिनिधि (जो अतिरिक्त महानिदेशक के पद से नीचे के न हों); गृह और पहाड़ी मामलों के विभाग के प्रतिनिधि (जो संयुक्त सचिव के पद से नीचे के न हों); और कोलकाता में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) के एक प्रतिनिधि शामिल हैं।
इस दल को भगदड़ से जुड़ी घटनाओं के सटीक क्रम का पता लगाने के लिए कहा गया, जिसमें घटना का समय, स्थान और परिस्थितियां शामिल हैं। यह दल जांच करेगा कि क्या अत्यधिक भीड़, खराब मौसम, गेट प्रबंधन, अफवाहें, बिजली की विफलता, प्रवेश और निकास की अपर्याप्त व्यवस्था, संरचनात्मक कमियां या भीड़-नियंत्रण उपायों में विफलता इस घटना का कारण बनीं।
SIT यह भी जांच करेगी कि भीड़ का दबाव सबसे पहले कब और कहां शुरू हुआ, यह कैसे भगदड़ में बदल गया, वहां कितने लोग मौजूद थे, भीड़ की आवाजाही और प्रवेश-निकास का प्रवाह कैसा था, और क्या वहां मौजूद लोगों की संख्या उस जगह की सुरक्षित क्षमता से अधिक थी।
जांच में मौसम की स्थिति, बारिश और आंधी-तूफान से जुड़ी चेतावनियां, सार्वजनिक घोषणाएं, घबराहट पैदा करने वाले संभावित कारण, और पंडाल में रास्तों, बैरिकेड्स, सीढ़ियों, गेटों, आपातकालीन निकासों तथा अन्य प्रवेश-निकास व्यवस्थाओं की पर्याप्तता की भी समीक्षा की जाएगी।
यह दल आयोजकों, निजी सुरक्षा कर्मियों, स्वयंसेवकों, पुलिस, एम्बुलेंस सेवाओं, अस्पतालों, अग्निशमन सेवाओं और नागरिक प्रशासन की तैयारियों और उनकी प्रतिक्रिया की भी बारीकी से जांच करेगा। इसमें सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो रिकॉर्डिंग, फोरेंसिक जांच के नतीजे, कॉल रिकॉर्ड, पुलिस स्टेशन और कंट्रोल रूम के लॉग, मेडिकल रिकॉर्ड और अन्य भौतिक साक्ष्यों की भी जांच की जाएगी।
आदेश में SIT को यह जांचने के लिए कहा गया कि क्या अनुमतियां लागू नियमों के अनुसार दी गईं, और क्या भीड़ प्रबंधन, आपदा प्रबंधन, लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने (इवैक्यूएशन) और पुलिस सुरक्षा-व्यवस्था की पर्याप्त योजनाएं बनाई गईं और उन्हें लागू किया गया। यह जांच इस बात पर भी होगी कि क्या ये योजनाएं लागू कानूनों, न्यायिक निर्देशों और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुरूप थीं।
SIT यह पता लगाएगी कि क्या आयोजकों, पुलिस अधिकारियों, कोलकाता नगर निगम, लोक निर्माण विभाग, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विभाग, सीईएससी लिमिटेड (CESC Limited) या किसी अन्य एजेंसी या व्यक्ति की ओर से कोई चूक, लापरवाही, कर्तव्य में कोताही या समन्वय (Coordination) की कमी हुई है। यदि ऐसा पाया जाता है, तो कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी।
यह समिति भीड़भाड़ वाले इलाकों, खासकर उत्तरी कोलकाता की संकरी गलियों में दुर्गा पूजा के दौरान जुटने वाली भारी भीड़ को नियंत्रित करने के उपायों की भी सिफारिश करेगी। इनमें वैज्ञानिक तरीके से तय की गई लोगों की अधिकतम संख्या (Footfall Limits), आने-जाने के लिए पर्याप्त रास्ते, सीसीटीवी निगरानी, पब्लिक एड्रेस सिस्टम (लाउडस्पीकर आदि), आपातकालीन स्थिति में लोगों को बाहर निकालने की योजनाएं और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल शामिल हो सकते हैं।
आदेश में SIT को यह भी जांचने के लिए कहा गया कि पीड़ितों और उनके परिवारों को क्या सहायता, मुआवजा और पुनर्वास (Rehabilitation) दिया गया या दिया जाना चाहिए। इसमें यह भी देखा जाएगा कि क्या घोषित की गई अनुग्रह राशि (Ex-Gratia) पर्याप्त है।
सभी संबंधित विभागों, प्राधिकरणों, एजेंसियों और व्यक्तियों को निर्देश दिया गया कि वे SIT को पूरा सहयोग दें और जांच के लिए जरूरी रिकॉर्ड, जानकारी और अन्य सहायता उपलब्ध कराएं।
जांच के लिए अगर किसी अतिरिक्त अधिकारी की जरूरत पड़ती है तो SIT राज्य सरकार से मदद ले सकती है। SIT को निर्देश दिया गया कि वह आदेश की तारीख से तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट, जांच के निष्कर्ष और सिफारिशें राज्य सरकार को सौंप दे।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होता है।