दिल्ली हाईकोर्ट ने अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों के लिए राष्ट्रीय आयोग के सदस्य के रूप में डॉ शाहिद अख्तर की नियुक्ति के खिलाफ याचिका पर नोटिस जारी किया

Update: 2021-12-17 11:45 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सदस्यों में से एक के रूप में वर्ष 2019 में सेंटर फॉर मैनेजमेंट स्टडीज, जामिया मिलिया इस्लामिया में प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किए गए डॉ शाहिद अख्तर की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया।

न्यायमूर्ति वी कामेश्वर राव ने मामले में जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए छह सप्ताह का समय देते हुए भारत संघ, जामिया मिलिया इस्लामिया, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग और डॉ. शाहिद अख्तर से जवाब मांगा।

इसके अलावा प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया।

याचिका जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली में अफ्रीकी अध्ययन में पीएच.डी. स्कॉलर ज़र्मिना इसरार खान द्वारा दायर की गई।

मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता इरम पीरजादा के साथ डॉ. अमित जॉर्ज पेश हुए।

याचिका में इस आधार पर नियुक्ति को चुनौती दी गई कि पहले तो सर्च कमेटी का कोई गठन नहीं किया गया। दूसरा, सदस्य के पद के लिए कोई अधिसूचना या विज्ञापन जारी नहीं किया गया।

नियुक्ति के संबंध में निर्णय लेने की प्रक्रिया को चुनौती देते हुए याचिका में कहा गया कि उक्त आयोग के सदस्य के रूप में डॉ शाहिद अख्तर की नियुक्ति एक सूचित प्रक्रिया नहीं है, क्योंकि शिक्षा मंत्रालय द्वारा इस पद के लिए कोई अधिसूचना या विज्ञापन जारी नहीं किया गया। इससे भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन किया जा रहा है। ।

याचिका में कहा गया कि एक नियुक्ति जो बिना विज्ञापन या अधिसूचना जारी किए की जाती है, पारदर्शिता और निष्पक्षता की कमी से ग्रस्त है। इसलिए, संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के उल्लंघन का मामला बन जाता है।

याचिका में कहा गया,

"डॉ. शाहिद अख्तर (प्रतिवादी नंबर 4) की विवादित नियुक्ति में समाप्त होने वाली पूरी प्रक्रिया शक्ति का एक रंगीन प्रयोग है और एनसीएमईआई अधिनियम, 2004 को भारत के संविधान, 1950 के अनुच्छेद की धारा तीन, चार और पांच सपठित धारा 14 और 16 में निहित वैधानिक प्रावधानों का खुले तौर पर उल्लंघन और कुल गैर-अनुपालन है।"

जामिया मिल्लिया इस्लामिया स्थित सेंटर फॉर मैनेजमेंट स्टडीज में पांच नवंबर, 2019 को खुली चयन समिति के माध्यम से डॉ. शाहिद अख्तर को प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किया गया था।

तब इस साल 17 अगस्त को एक गजट अधिसूचना जारी की गई। इसमें अख्तर को एनसीएमईआई का सदस्य नियुक्त किया गया।

याचिका में कहा गया,

"यह निर्विवाद है कि एनसीएमईआई के सदस्य के रूप में नियुक्त किए जाने वाले व्यक्ति को "प्रतिष्ठित व्यक्ति" होना चाहिए और उसके पास आवश्यक योग्यता होनी चाहिए। न ही किसी व्यक्ति की ऐसी विशेषज्ञता, शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और कद है जिसे नियुक्त करने का प्रस्ताव है। यह सम्मानित कार्यालय डॉ. शाहिद अख्तर (प्रतिवादी नंबर चार) के पास है और न ही यह संवैधानिक योजना के अनुरूप है।"

अदालत ने आदेश दिया,

"14 फरवरी को दलीलें पूरी करने के लिए रजिस्ट्रार के समक्ष सूची दें।"

केस शीर्षक: जर्मीना इसरार खान बनाम भारत संघ और अन्य।

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