CJI ने नए कारगिल कोर्ट कॉम्प्लेक्स का किया उद्घाटन, दिया शांति का संदेश

Update: 2026-03-30 14:09 GMT

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने रविवार को कारगिल में नए ज़िला कोर्ट कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन किया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस क्षेत्र को शांति के समय में न्याय की संस्थाओं के ज़रिए मज़बूत बनाया जाना चाहिए, न कि सिर्फ़ युद्ध के समय दिए गए बलिदानों के लिए याद किया जाना चाहिए।

उद्घाटन भाषण देते हुए चीफ जस्टिस ने कहा कि 1999 के युद्ध के दौरान दिए गए बलिदानों की वजह से कारगिल का राष्ट्रीय चेतना में खास स्थान है, लेकिन उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि राष्ट्र की ज़िम्मेदारी सिर्फ़ याद करने तक ही सीमित नहीं है।

उन्होंने कहा,

"कारगिल को सिर्फ़ लड़ाई के समय ही याद नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि शांति के समय में इसे मज़बूत बनाया जाना चाहिए।"

उन्होंने यह भी कहा कि कोर्ट जैसी संस्थाएं नागरिकों की गरिमा और निरंतरता के साथ सेवा करने के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को फिर से पक्का करती हैं।

चीफ जस्टिस ने नए कोर्ट कॉम्प्लेक्स के उद्घाटन को लद्दाख जैसे दूरदराज और भौगोलिक रूप से मुश्किल क्षेत्रों में न्याय तक पहुंच के वादे को पूरा करने की दिशा में एक अहम कदम बताया। उन्होंने कहा कि कारगिल जैसी जगहों पर न्यायिक बुनियादी ढाँचे को मज़बूत करना यह दिखाता कि संविधान सिर्फ़ बड़े शहरों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देश के सबसे दूरदराज के क्षेत्रों तक भी पहुंचता है।

इस क्षेत्र के अनोखे भूभाग और कड़ाके की सर्दियों का ज़िक्र करते हुए चीफ जस्टिस ने कहा कि कारगिल में कोर्ट तक पहुंचने के लिए अक्सर मुक़दमे लड़ने वालों को काफ़ी मेहनत और पक्के इरादे की ज़रूरत होती है, क्योंकि सड़कें कई महीनों तक बंद रहती हैं। ऐसे हालात में उन्होंने कहा, कोर्ट की इमारत का एक गहरा मतलब होता है; यह इस बात का भरोसा दिलाती है कि भौगोलिक मुश्किलों के बावजूद कानून तक पहुंच बनी रहेगी।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने आगे कहा कि यह नया कॉम्प्लेक्स सिर्फ़ जगह का विस्तार नहीं है, बल्कि संस्थागत क्षमता और समुदाय की सेवा करने की तत्परता का भी विस्तार है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह सुविधा लद्दाख के ठंडे रेगिस्तानी इलाके में एक "मरुद्यान" (Oasis) बन जाएगी, जहां लोग न्याय प्रणाली के ज़रिए अपने मसलों का हल, स्पष्टता और उम्मीद पा सकेंगे।

चीफ जस्टिस ने उन न्यायिक अधिकारियों और कोर्ट कर्मचारियों के समर्पण की भी सराहना की जो मुश्किल जलवायु परिस्थितियों में अक्सर अपने परिवारों से दूर और सीमित संसाधनों के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके काम को पहचान मिलनी चाहिए और उन्हें उचित बुनियादी ढांचा मिलना चाहिए ताकि वे कुशलता और गरिमा के साथ अपनी सेवाएं दे सकें।

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