'हेट स्पीच' PILs | इंटरव्यू के चुनिंदा हिस्से वास्तविक अर्थ को बिगाड़ सकते हैं: असम सीएम ने गुवाहाटी हाईकोर्ट से कहा, पूरे ट्रांसक्रिप्ट मांगे
अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ कथित हेट स्पीच के मामले में कार्रवाई की मांग करने वाली जनहित याचिकाओं (PIL) के जवाब में असम सीएम डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के सामने कहा कि उन पर लगे आरोप न्यूज़ क्लिपिंग की फोटोकॉपी पर आधारित हैं, जिनमें से कुछ चुनिंदा लाइनें निकाली गई हैं जो उनके असली इरादे को बिगाड़ सकती हैं।
अपने हलफनामे में सीएम सरमा ने याचिकाकर्ताओं द्वारा इस्तेमाल की गई सामग्री की असलियत पर गंभीर सवाल उठाए।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी इंटरव्यू से चुनिंदा हिस्से या कुछ लाइनें निकालने से बयानों का असली मतलब और मकसद बिगड़ सकता है। इससे एक ऐसा असर पड़ सकता है, जो उनके कहने या बताने के इरादे से बिल्कुल अलग हो।
यह कहते हुए कि मूल सामग्री को देखे बिना वह याचिकाओं में कही गई बातों का ठीक से जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं, सीएम सरमा ने कोर्ट से गुहार लगाई कि वह याचिकाकर्ताओं को निर्देश दे कि वे कथित इंटरव्यू और बयानों के मूल, पूरे और बिना एडिट किए हुए ट्रांसक्रिप्ट या रिकॉर्डिंग पेश करें ताकि वह एक प्रभावी और सार्थक जवाब दे सकें।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि न्यूज़ रिपोर्टर और लेखक, उन्हें चुनिंदा तरीके से कोट करते हुए अपनी टिप्पणियां, व्याख्याएं और संपादकीय राय जोड़ देते हैं, जिसका मकसद और असर उनकी साख को नुकसान पहुंचाना होता है।
इसके अलावा, सीएम सरमा ने कहा कि इन्हीं आरोपों के जवाब में आपराधिक न्याय प्रणाली पहले ही हरकत में आ चुकी है। उनके हलफनामे में विशेष रूप से उनकी कथित स्पीच को लेकर उनके खिलाफ दर्ज FIRs का ज़िक्र किया गया।
सीएम सरमा का हलफनामा हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले अश्विनी कुमार उपाध्याय बनाम भारत संघ, 2026 LiveLaw (SC) 437 पर आधारित हैं, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मौजूदा आपराधिक कानून हेट स्पीच के अपराध से निपटने के लिए पर्याप्त हैं।
इसलिए हलफनामे में यह दलील दी गई कि सुप्रीम कोर्ट के निष्कर्षों को देखते हुए और इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि FIR पहले ही दर्ज हो चुकी है और जांच अभी चल रही है, इन PIL याचिकाओं को शुरुआती चरण में ही खारिज कर दिया जाना चाहिए।
यह हलफनामा 27 मई को चीफ जस्टिस आशुतोष कुमार और जस्टिस अरुण देव चौधरी की खंडपीठ के समक्ष दायर किया गया, जिसने इसे रिकॉर्ड पर ले लिया और मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त के लिए तय की।
इस बीच पीठ ने निर्देश दिया कि याचिका में उद्धृत भाषणों की पूरी प्रतिलिपि (ट्रांसक्रिप्ट) अदालत की सुविधा के लिए दायर की जाए।
उल्लेखनीय है कि असमिया स्कॉलर डॉ. हिरेन गोहेन और दो अन्य द्वारा दायर जनहित याचिकाएं (PIL) मुख्यमंत्री सरमा को कथित नफरत भरे भाषण देने से रोकने और BNS की विभिन्न धाराओं के तहत कथित संज्ञेय अपराधों की जांच और/या छानबीन शुरू करने के निर्देश देने की मांग करती हैं।
21 अप्रैल को याचिकाओं की सुनवाई करते हुए अदालत ने मुख्यमंत्री सरमा को याचिकाओं पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए 4 सप्ताह का और समय दिया।
उस दिन CPI(M) की असम इकाई की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी थी कि मुख्यमंत्री सरमा ने इस साल फरवरी में हाईकोर्ट द्वारा इस मामले में औपचारिक रूप से नोटिस जारी किए जाने के बाद भी विवादास्पद टिप्पणियां करना जारी रखा था।