मुंबई पुलिस ने आधी रात को गिराई डॉ. बी.आर. अंबेडकर द्वारा स्थापित ऐतिहासिक प्रिंटिंग प्रेस, हाईकोर्ट ने लगाई फटकार
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में मुंबई पुलिस को उसके "बिना सोचे-समझे" दिए गए हलफनामे के लिए फटकारा। इस हलफनामे में पुलिस ने दादर के एक प्लॉट पर डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर द्वारा 1945 में स्थापित प्रिंटिंग प्रेस को अचानक गिराए जाने के मामले में अपनी "निष्क्रियता" को सही ठहराने की कोशिश की थी।
इस संपत्ति को 25 जून, 2016 की सुबह-सवेरे तब गिरा दिया गया, जब 400 से 500 लोगों की भीड़ उस जगह पर जमा हो गई।
जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस कमल खाता की डिवीज़न बेंच ने 30 अप्रैल को आदेश जारी किया। इस आदेश में पुलिस अधिकारियों से यह बताने को कहा गया कि 25 जून, 2016 को अंबेडकर के पोते द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
बता दें, यह शिकायत तब की गई थी, जब 'बुद्ध भूषण प्रिंटिंग प्रेस' के नाम से मशहूर उस प्रिंटिंग प्रेस को आधी रात में गिराया जा रहा था और उस जगह पर 400 से 500 लोग जमा थे।
उल्लेखनीय है कि डॉ. अंबेडकर के पोते प्रकाश अंबेडकर द्वारा दायर याचिका में यह आरोप लगाया गया कि जिस संपत्ति को गिराया गया, उसमें किताबें और दस्तावेज़ रखे हुए थे। इसे दलित इतिहास और अंबेडकर आंदोलन के एक बड़े प्रतीक को नष्ट करने की कोशिश के तौर पर देखा गया।
मुंबई पुलिस ने शहर के दादर इलाके के एक ज़ोनल असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (ACP) के ज़रिए एक हलफनामा दायर किया।
इसमें पुलिस ने यह कहकर अपनी कार्रवाई को सही ठहराने की कोशिश की कि उसने एहतियाती कदम उठाए। साथ ही यह भी कि शिकायतकर्ता आनंद अंबेडकर ने उस इमारत को गिराए जाने से रोकने के लिए कोई दस्तावेज़ पेश नहीं किए।
इस हलफनामे को "बिना सोचे-समझे" तैयार किया गया बताते हुए बेंच ने कहा कि ऐसा हलफनामा पढ़कर उसे गहरा दुख हुआ।
Case Title: Prakash Y Ambedkar vs Vijay Balkrishna Ranpise (Writ Petition 1782 of 2017)