एंटीलिया बम कांड में बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को स्पेशल कोर्ट से मिली जमानत के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की अपील की सुनवाई से बॉम्बे हाईकोर्ट के तीन जजों ने खुद को अलग कर लिया। NIA ने स्पेशल कोर्ट के जमानत आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। अब तीन जजों के सुनवाई से अलग होने के बाद इस मामले की सुनवाई के लिए नई बेंच के गठन की जरूरत पड़ सकती है।

बुधवार 30 सितंबर को NIA की अपील जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस आशीष चव्हाण की डिवीजन बेंच के सामने सूचीबद्ध थी। इस बेंच ने मंगलवार शाम को ही मामले को सूचीबद्ध करने की अनुमति दी थी। हालांकि, बुधवार को जब मामले की सुनवाई के लिए पुकार हुई तो जस्टिस डांगरे ने शुरुआत में ही अपील की सुनवाई से खुद को अलग करने की बात कही।

जस्टिस डांगरे ने बताया कि उन्होंने इससे पहले सचिन वाजे की अन्य आपराधिक मामले में दाखिल याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग किया और उस मामले में उन्होंने एक कारणयुक्त आदेश भी पारित किया। उस मामले में वाजे के साथ महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख भी आरोपी हैं।

इस पर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने कहा कि मौजूदा मामला अलग है और NIA की यह अपील एंटीलिया बम कांड में मिली जमानत से संबंधित है।

जस्टिस डांगरे ने जवाब दिया कि उन्होंने विशेष रूप से इस मामले में एक आदेश पारित किया, क्योंकि वाजे का संबंध एक मंत्री यानी अनिल देशमुख से जुड़े कुछ मामलों से था। उन्होंने कहा कि भले ही मौजूदा मामला अलग है लेकिन दोनों मामलों के बीच कहीं न कहीं संबंध हैं और इसलिए उन्हें इस मामले की सुनवाई नहीं करनी चाहिए।

इसके बाद जस्टिस डांगरे ने यह भी बताया कि जस्टिस आशीष चव्हाण भी इस मामले की सुनवाई करने के इच्छुक नहीं हैं, क्योंकि वह अनिल देशमुख से जुड़े मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई की ओर से पेश हो चुके हैं।

इन परिस्थितियों में जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस आशीष चव्हाण की बेंच ने NIA की अपील की सुनवाई से खुद को अलग करने का आदेश पारित किया।

इससे पहले मंगलवार शाम को NIA ने अपनी अपील को जस्टिस सारंग कोतवाल और जस्टिस रंजीतसिंहा भोंसले की डिवीजन बेंच के सामने भी पेश किया। इस बेंच के पास NIAcकी अपीलों की सुनवाई का रोस्टर है। हालांकि, उस बेंच ने भी मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया।

जस्टिस सारंग कोतवाल ने बताया कि सीनियर एडवोकेट मनोज मोहते पहले सचिन वाजे की ओर से पेश हो चुके हैं और वह उन पक्षकारों से जुड़े मामलों की सुनवाई नहीं करते, जिनकी ओर से मनोज मोहते पेश हो चुके हों। जस्टिस कोतवाल अपने वकालत के दिनों में मनोज मोहते के साथ जुड़े रहे थे।

इस तरह सचिन वाजे को मिली जमानत के खिलाफ NIA की अपील की सुनवाई से बॉम्बे हाईकोर्ट के कुल तीन जजों अलग हो चुके हैं। अब NIA की ओर से इस अपील को चीफ जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी के सामने पेश किए जाने की संभावना है।

NIA चीफ जस्टिस से अपील की सुनवाई के लिए विशेष बेंच गठित करने का अनुरोध कर सकती है, ताकि स्पेशल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई हो सके जिसके तहत सचिन वाजे को एंटीलिया बम कांड में जमानत दी गई।

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