सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) से लिखित जवाब मांगा कि वे बताएं कि NEET-PG परीक्षा के प्रश्न और उनकी उत्तर कुंजी (आंसर की) को सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाना चाहिए।

जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच 'डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन' द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में अन्य मांगों के साथ-साथ यह भी कहा गया कि परीक्षा के तुरंत बाद NBEMS को प्रश्न पत्र और उत्तर कुंजी के साथ-साथ हर उम्मीदवार की OMR उत्तर पुस्तिका (आंसर शीट) को उनके लॉग-Fन अकाउंट पर अपलोड करना चाहिए।

इस मामले में 15 अक्टूबर को नोटिस जारी किया गया।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश सीनियर वकील शिखिल सूरी ने कहा कि NBEMS ने 'मास्टर सेट' और उसके उत्तर तो जारी कर दिए, लेकिन जिन प्रश्नों से अन्य सेट तैयार किए गए, उनके मामले में केवल 'प्रश्न ID' ही दी गईं।

NBEMS के वकील ने बताया कि PG के लिए प्रश्न बैंक बहुत सीमित है, इसलिए यह एक 'राष्ट्रीय संपत्ति' (नेशनल एसेट) है।

NBEMS के वकील ने कहा:

"हम अभी पोर्टल पर जो जानकारी दे रहे हैं, वह 'मास्टर प्रश्न पत्र' नहीं है। हर उम्मीदवार को अलग प्रश्न पत्र मिलता है क्योंकि प्रश्नों को अलग-अलग सेट में शफल (अदला-बदली) किया जाता है। हम पोर्टल पर प्रश्न ID, उत्तरों की स्थिति और सही उत्तर क्या था, यह जानकारी दे रहे हैं। हम केवल प्रश्न नहीं दिखा रहे हैं, बल्कि उनकी ID दे रहे हैं।"

इस मामले में पेश हुए वकीलों में से एक ने दावा किया कि पिछले वर्षों के NEET-PG प्रश्न पत्र अमेज़न (Amazon) पर आसानी से बिकते रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि फिर NBEMS प्रश्नों को सार्वजनिक करने से क्यों हिचकिचा रहा है?

इस पर जस्टिस नरसिम्हा ने पूछा:

"फिर पारदर्शिता (ट्रांसपेरेंसी) का क्या होगा?"

NBEMS के वकील ने जवाब दिया:

"NEET PG के लिए प्रश्न बैंक, पूरी व्यवस्था में सबसे ऊपर है। यह गणित नहीं, बल्कि विज्ञान है; यहां कुछ निश्चित प्रश्नों के लिए निश्चित उत्तर होते हैं। माननीय जजों को यह देखना होगा कि यह जनहित में है। प्रश्नों की संख्या बहुत सीमित है और हमारे पास पूरे देश से विशेषज्ञ आते हैं, जो यह प्रश्न बैंक तैयार करते हैं। इन पर किसी का कॉपीराइट नहीं होता, क्योंकि ये एक राष्ट्रीय संपत्ति बन जाते हैं। अगर हम हर साल प्रश्नों को सार्वजनिक करना शुरू कर दें तो अगले 5-6 वर्षों में हमारे सभी प्रश्न सामने आ जाएंगे... यह एक कठिन परीक्षा है... हम नहीं चाहते कि उनके पास प्रश्नों की 'कुंजी' (उत्तर कुंजी) हो।"

उन्होंने यह भी बताया कि कई देशों में (AIIMS सहित) इस तरह के मॉडल का पालन किया जाता है, जहाँ प्रश्न पत्र सार्वजनिक नहीं किए जाते।

लेकिन जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि अन्य देशों में जो होता है, वह भारत के लिए कोई आदर्श मॉडल नहीं है। उन्होंने मामले की सुनवाई स्थगित कर दी, लेकिन NBEMS के वकील से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा कि उनकी स्थिति उन अन्य परीक्षाओं से अलग क्यों है, जहाँ प्रश्न सार्वजनिक कर दिए जाते हैं।

आगे कहा गया,

"हमें थोड़ा और विस्तार से बताएं कि आपकी स्थिति अलग क्यों है।"

अदालत ने आदेश दिया:

"नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) को लिखित रूप में यह स्पष्ट करना होगा कि प्रश्नों को सार्वजनिक करने से पोस्टग्रेजुएट NEET परीक्षा की शुचिता (Integrity) पर कोई आंच क्यों नहीं आएगी।"

यह याचिका मुख्य याचिकाओं के साथ सूचीबद्ध की गई— 'फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन' (अधिवक्ता तन्वी दुबे) और 'यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट' (अधिवक्ता चारू माथुर और रितु रानीवाल, UDF की ओर से)—जिनमें 'नेशनल टेस्टिंग एजेंसी' (NTA) के कामकाज से जुड़ी संरचनात्मक समस्याओं को चुनौती दी गई।

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